दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं: केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा

दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं: केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा

दिल्ली जिमखाना क्लब के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं: केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा
Modified Date: September 3, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: September 3, 2026 4:27 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ के परिसर से दिल्ली जिमखाना क्लब को हटाने के मामले में 16 सितंबर तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेगी।

सरकार ने यह बात दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष कही। न्यायमूर्ति झिंगन, दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।

इन याचिकाओं में, भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डी ओ) के संपदा अधिकारी द्वारा क्लब के प्रबंधन को 29 जून को जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। यह नोटिस क्लब को उक्त स्थान से हटाने के लिए जारी किया गया था।

खुराना और ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन’ की याचिकाएं उस लंबित मुकदमे का हिस्सा हैं, जो भूमि एवं विकास कार्यालय के 22 मई के उस आदेश के बाद दायर किया गया था, जिसमें ‘‘रक्षा बुनियादी ढांचा को मजबूत और सुरक्षित करने’’ के आधार पर औपनिवेशिक युग के क्लब का स्थायी पट्टा खत्म कर दिया गया था और पांच जून तक जमीन खाली करने को कहा गया था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा, ‘‘हम कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे। (पूर्व का) बयान लागू रहेगा। हम (अगली तारीख तक) कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे।’’

खुराना की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज और दलीलें दाखिल हो चुकी हैं और बेदखली के नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने के मामले पर सुनवाई होनी है।

हालांकि, न्यायमूर्ति झिंगन ने कहा कि वह इस मामले पर बहस के लिए कोई दूसरी तारीख तय करेंगे और सुझाव दिया कि इस बीच, सदस्य अपना जवाब संपदा अधिकारी के विचारार्थ दाखिल करें।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह करना चाहता हूं कि इस (अंतरिम राहत) मामले में आगे बढ़ने से पहले, संपदा अधिकारी इस मुद्दे को देखें… कि क्या उन्हें आगे बढ़ना चाहिए, क्या वह आगे बढ़ सकते हैं…।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्राधिकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि जब क्षेत्राधिकार का मामला ही लंबित है, तो उन्हें नोटिस पर आगे बढ़ना चाहिए या नहीं।’’

सिंघवी ने कहा कि संपदा अधिकारी के क्लब सदस्यों के पक्ष में फैसला सुनाने की संभावना कम है और उनके समक्ष दिया जाने वाला कोई भी जवाब उच्च न्यायालय में उनके मामले पर बिना किसी पूर्वाग्रह के होना चाहिए।

अदालत ने वादी पक्ष के वकील को निर्देश लेने के लिए समय दिया और मामले की सुनवाई 16 सितंबर के लिए निर्धारित कर दी।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


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