पीएम श्री योजना पर अबतक फैसला नहीं, कानूनी राय लेंगे : मुख्यमंत्री सतीशन

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पीएम श्री योजना पर अबतक फैसला नहीं, कानूनी राय लेंगे : मुख्यमंत्री सतीशन

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 05:06 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 05:06 PM IST

तिरुवंनतपुरम, 10 जून (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने बुधवार को कहा कि राज्य ने केंद्र की ‘पीएम श्री’ योजना को लागू करने के बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार द्वारा पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) को लेकर किए गए समझौते से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सतीशन मीडिया की उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें कहा गया था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार विपक्ष में रहते हुए विरोध करने के बावजूद इस योजना में शामिल हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम श्री और श्रम संहिता सहित कई ऐसे मुद्दे थे जिन पर पिछली सरकार पहले ही कार्रवाई कर चुकी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कोई फैसला नहीं किया है। मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं जो उन फैसलों पर आधारित हैं, जो लिए ही नहीं गए हैं। हम कानूनी राय लेने के बाद ही कोई फैसला करेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने पिछली एलडीएफ सरकार पर कड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसने पीएम श्री योजना में केरल की भागीदारी का सार्वजनिक रूप से विरोध किया, जबकि केंद्र के साथ चुपचाप एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

सतीशन के अनुसार, मौजूदा स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि पिछली सरकार ने मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों को भी सूचित किए बिना समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘यह समझौता किसी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि केरल सरकार ने किया था। भले ही सरकारें बदल गई हों, लेकिन राज्य अपने नाम पर किए गए समझौतों से बंधा हुआ है। हम इस मामले के कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रहे हैं।’’

सतीशन ने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी केवल तत्कालीन मुख्यमंत्री (पिनरायी विजयन) और तत्कालीन सामान्य शिक्षा मंत्री (वी शिवनकुट्टी) को ही थी।

उनका यह बयान पीएम श्री योजना को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है, क्योंकि मीडिया के कुछ हिस्सों में यह खबर है कि यूडीएफ सरकार केंद्र द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम में शामिल होने पर विचार कर रही थी।

विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस योजना की पहले आलोचना करने के बावजूद इसे लागू करने की कोशिश कर रही है।

भाषा धीरज मनीषा

मनीषा