नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) सिख गुरुओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी के मामले में दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने अपने ऊपर लगे आरोपों का सोमवार को खंडन किया और सदन की आधिकारिक कार्यवाही की बिना संपादित वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की।
उन्होंने विशेषाधिकार समिति द्वारा पूर्व में जारी किए गए नोटिस के जवाब में अपना जवाब दिया।
इस महीने दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने आरोप लगाया कि आतिशी ने गुरु तेग बहादुर के खिलाफ ‘असंवेदनशील शब्दों’ का इस्तेमाल किया और उनसे माफी मांगने की मांग की।
आतिशी ने अपने पत्र में कहा, ‘मैं अत्यंत स्पष्टता और ईमानदारी से यह कहना चाहती हूं कि मैंने छह जनवरी 2026 को सदन में या अपने जीवन में कभी भी सिख गुरुओं के विरुद्ध कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। मैं इस आरोप का पूर्णतः खंडन करती हूं।’
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा था कि विशेषाधिकार समिति ने इस मामले में आतिशी के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी है और उनसे 19 जनवरी तक लिखित जवाब देने का अनुरोध किया गया है।
पिछले साल नवंबर में गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार के कार्यक्रम पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा भाजपा विधायकों ने उठाया था।
आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक आतिशी ने अपने पत्र में कहा कि विधानसभा के नोटिस में ‘सदन में अराजकता’ और ‘कार्यवाही में बाधा’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कथित तौर पर क्या कहा गया, किस संदर्भ में कहा गया और किस आधार पर उन्हें ‘अपमानजनक’ बताया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ऐसे विवरणों के अभाव में, मुझे एक अस्पष्ट और निराधार आरोप का जवाब देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो कि एक असहनीय स्थिति है। यह प्राकृतिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत है।’
अतिशी ने अपने खिलाफ दर्ज शिकायत की एक प्रति और ‘उक्त तिथि की आधिकारिक कार्यवाही की बिना संपादित वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ ही साक्ष्य कानून के तहत एक प्रमाण पत्र’ की मांग की।
आतिशी ने अध्यक्ष के उस पत्र की प्रतियां भी मांगीं जिसमें उन्हें बैठक में उपस्थित होने और आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया था।
भाषा आशीष माधव
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