वर्ष 2026 की पहली छमाही में एनजीटी का कोई फैसला पर्यावरण हित के पक्ष में नहीं: विश्लेषण

वर्ष 2026 की पहली छमाही में एनजीटी का कोई फैसला पर्यावरण हित के पक्ष में नहीं: विश्लेषण

वर्ष 2026 की पहली छमाही में एनजीटी का कोई फैसला पर्यावरण हित के पक्ष में नहीं: विश्लेषण
Modified Date: September 19, 2026 / 09:00 pm IST
Published Date: September 19, 2026 9:00 pm IST

(अलिंद चौहान)

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को भले ही यह कहा कि भारतीय अदालतों को पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कायम करना चाहिए, लेकिन इस बीच एक विश्लेषण में सामने आया है कि 2026 के पहले छह महीनों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरणीय न्याय या जनहित के पक्ष से दायर अपीलों में एक बार भी फैसला उनके पक्ष में नहीं दिया।

इसके विपरीत परियोजना प्रवर्तकों, संपत्ति मालिकों या उद्योग पक्ष को अपनी अपीलों में 58.8 प्रतिशत सफलता मिली।

पर्यावरण कानूनों पर काम करने वाले ‘साउथ एशियन रिपोर्टर फॉर एनवायरनमेंट लॉज़’ (एसएआरईएल) के विश्लेषण में जनवरी से जून 2026 के बीच एनजीटी की पांचों पीठों में दायर 119 अपीलों का अध्ययन किया गया।

पर्यावरण या जनहित से जुड़े पक्षों ने गुण-दोष के आधार पर दायर की गई 119 अपीलों में से 16 अपीलें दायर कीं, जबकि परियोजना-प्रस्तावक, संपत्ति-मालिक या उद्योग पक्ष ने ऐसी 51 अपीलें दायर कीं।

इनमें में 50 से अधिक अपीलें तकनीकी या प्रक्रियात्मक आधारों पर खारिज कर दी गईं।

विश्लेषण में पाया गया, ‘‘जनहित से जुड़े पक्ष को उसके सभी 16 मामलों में कोई भी अनुकूल फैसला नहीं मिला। इसके विपरीत, उद्योग पक्ष की लगभग एक-तिहाई अपीलें ही खारिज हुईं और उसे 59 प्रतिशत मामलों में अनुकूल आदेश मिला। इसके अलावा छह प्रतिशत मामलों में यथास्थिति बरकरार रखी गई।’’

इसमें यह भी बताया गया कि तकनीकी आधार पर अपीलों को खारिज किया जाना एक बड़ा पैमाना रहा। कुल अपीलों में से 44 प्रतिशत को परिसीमा, अधिकार-क्षेत्र, सुनवाई योग्य होने की शर्तों या बिना गुण-दोष पर निर्णय के मामला वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया गया।

एनजीटी की प्रधान क्षेत्रीय पीठ (दिल्ली) में उद्योग, परियोजना-प्रस्तावक और संपत्ति-मालिक पक्ष ने गुण-दोष के आधार पर तय की गई 10 अपीलों में से पांच में जीत हासिल की।

पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ (पुणे) में इस पक्ष ने ऐसी 24 अपीलों में से 15 में जीत हासिल की, जबकि दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ (चेन्नई) में 12 में से नौ और केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ (भोपाल) में पांच में से एक अपील में जीत मिली।

ये निष्कर्ष शनिवार को नयी दिल्ली में एनजीटी के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स” के उद्घाटन के अवसर पर भारत के प्रधान न्यायाधीश द्वारा कही गई बातों से इतर तस्वीर पेश करते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने अपने संबोधन कहा था, “वर्तमान में हमारी अदालतों के सामने सवाल अब संरक्षण बनाम विकास का नहीं रह गया है, बल्कि यह है कि दोनों के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाए और उन्हें किस प्रकार टिकाऊ बनाया जाए।”

भाषा शोभना संतोष

संतोष


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