केवल दिव्यांग होने की वजह से किसी को प्रजनन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता: अदालत

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केवल दिव्यांग होने की वजह से किसी को प्रजनन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता: अदालत

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 05:26 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 05:26 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक दिव्यांग महिला की ‘हिस्टेरेक्टॉमी’ (गर्भाशय निकालने की सर्जरी) कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल दिव्यांगता के आधार पर किसी व्यक्ति को प्रजनन अधिकारों से वंचित करने और जननांग हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उच्च न्यायालय ने कहा कि इस सर्जरी से जुड़ा कोई भी कदम केवल चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर ही उठाया जा सकता है और विशेषज्ञों को यह बताना होगा कि यह संबंधित महिला के हित में है और इससे उसकी सुरक्षा, कल्याण एवं गरिमा की रक्षा होगी।

अदालत ने यह टिप्पणी एक दिव्यांग महिला के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। माता-पिता ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह दिल्ली सरकार को उनकी बेटी की ‘हिस्टेरेक्टॉमी’ कराने पर विचार करने का निर्देश दे।

माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी मासिक धर्म के दौरान खुद की देखभाल नहीं कर पाती।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 22 सितंबर को पारित आदेश में कहा, ‘‘सिर्फ दिव्यांग होने के कारण किसी व्यक्ति से बच्चे पैदा करने से जुड़े उसके अधिकार नहीं छीने जा सकते और न ही उसका जननांग हटाया जा सकता। ऐसी सर्जरी तभी की जा सकती है, जब चिकित्सा जांच में यह साबित हो जाए कि ऐसा किया जाना उस व्यक्ति के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं गरिमा के लिए जरूरी है।”

अदालत ने अधिकारियों को एक स्वतंत्र बहु-विषयक चिकित्सा बोर्ड बनाने और चार सप्ताह में महिला की सर्जरी पर फैसला लेने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने केवल चिकित्सा बोर्ड गठित करने की अनुमति दी है। यह बोर्ड महिला की जटिल चिकित्सा स्थिति को देखते हुए यह तय करेगा कि ऐसी सर्जरी की जरूरत है या नहीं।

अदालत ने कहा, “इसे सर्जरी की मंजूरी या पूरी छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।”

माता-पिता ने अदालत को बताया कि उनकी बेटी मार्च 2005 में जन्मी थी और अब मानसिक रूप से कमजोर वयस्क है।

उन्होंने कहा कि उसकी दिव्यांगता स्थायी है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी सर्जरी के लिए अपनी सहमति देने की मानसिक स्थिति में नहीं है।

माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी मासिक धर्म के दौरान खुद की देखभाल और स्वच्छता बनाए रखने में सक्षम नहीं है।

राज्य सरकार के वकील ने कहा कि महिला का इलाज अशोक विहार स्थित दीपचंद बंधु अस्पताल में किया जा रहा है और सर्जरी चिकित्सकों के बोर्ड की मंजूरी के बाद ही हो सकती है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश