एनसीईआरटी की नयी पाठ्यपुस्तक में किया गया अल्प ज्ञात महिला शासकों का उल्लेख

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एनसीईआरटी की नयी पाठ्यपुस्तक में किया गया अल्प ज्ञात महिला शासकों का उल्लेख

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 05:59 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 05:59 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) एनसीईआरटी की ओर से तैयार की गई कक्षा-9 की नयी सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी से लेकर उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा तक भारत की अल्प ज्ञात महिला शासकों के बारे में जानकारी दी गई है।

नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार को ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ नामक यह पाठ्यपुस्तक जारी की गई। पाठ्यपुस्तक का पहला भाग इस साल जून में जारी किया गया था।

रानी नायकी देवी को 1178 में माउंट आबू के पास कसरहड़ा में मोहम्मद गोरी को हराने का श्रेय दिया जाता है। सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए एक के बाद एक आक्रमणों का विवरण देने वाले अध्याय ‘प्रतिरोध और दृढ़ता’ में तुर्क आक्रमणकारियों के खिलाफ हिंदू शाही शासकों, चंदेलों, सोलंकियों और चौहानों के प्रतिरोध का भी उल्लेख किया गया है।

वर्तमान कर्नाटक के उल्लाल की शासक रानी अब्बक्का चौटा (1525 से 1570) ने पुर्तगालियों की नौसेना का डटकर सामना किया था।

काकतीय वंश की रानी रुद्रमा देवी का भी इस पाठ्यपुस्तक में उल्लेख किया गया है, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत के समक्ष प्रतिरोध किया था।

पाठ्यपुस्तक में बताई गईं कम चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में मदुरै के मुथु वीरप्पा नायक की कहानी भी शामिल है। माना जाता है कि उन्होंने मुगल दरबार की ओर से भेजी गई चप्पल के सामने झुकने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय उसमें अपना पैर रख दिया था।

पाठ्यपुस्तक में यह भी बताया गया है कि तमिलनाडु के जिंजी (सेनजी) किले को 2025 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। पाठ्यपुस्तक के अनुसार किले पर विजयनगर नायकों, बीजापुर सल्तनत, मुगलों, मराठों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों का शासन रहा।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अपनी सामाजिक विज्ञान और इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में महिला नेताओं की भूमिका को शामिल करता रहा है।

इस साल की शुरुआत में कक्षा-8 की पाठ्यपुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, पार्ट-1’ में नेतृत्व, शासन व प्रतिरोधी आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कई महिला नेताओं का उल्लेख किया गया था।

इस पाठ्यपुस्तक में शामिल ऐतिहासिक हस्तियों में रानी दुर्गावती भी थीं, जिन्हें गढ़ा/गोंड राज्य में साहस, नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता वाली शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस पाठ्यपुस्तक में ‘द माइटी मराठा वुमेन’ विषय के तहत ताराबाई और अहिल्याबाई होलकर का भी उल्लेख किया गया है।

भाषा जोहेब माधव

माधव