नीट मामले में प्रदर्शन में किसी की मौत नहीं हुई, कांग्रेस के समय कई प्रदर्शनकारी मारे गए: रीजीजू
नीट मामले में प्रदर्शन में किसी की मौत नहीं हुई, कांग्रेस के समय कई प्रदर्शनकारी मारे गए: रीजीजू
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर पिछले दिनों हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसी की जान नहीं गई, जबकि कांग्रेस सरकारों के समय पुलिस गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे।
अल्पसंख्यक और संसदीय मामलों के मंत्री रीजीजू रीजीजू ने कांग्रेस शासन के दौरान प्रशासन द्वारा बल प्रयोग की उन 11 घटनाओं का उल्लेख किया, जिनमें आम नागरिकों की मौत हुई थी। उन्होंने बताया कि 60 के दशक में मिजोरम में भारतीय नागरिकों पर बमबारी के लिए भारतीय वायु सेना का इस्तेमाल किया गया था, जबकि 1969 में तेलंगाना आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में 369 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकतर छात्र थे।
रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान दिल्ली में तुर्कमान गेट को ध्वस्त करने और पुलिस गोलीबारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय हुई मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर एक रहस्य बना रहा, जबकि पुलिस का दावा था कि छह लोगों की मौत हुई थी।
उन्होंने दावा किया कि गोली चलाने का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी ने कहा था कि मरने वालों की संख्या 20 या उससे अधिक थी।
रीजीजू ने कहा, ‘‘सरकार के लिए नागरिकों की जान और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसी की जान नहीं गई, जबकि कई अपराधियों ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की थी।’’
रीजीजू ने यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि ‘दिल्ली पुलिस की तारीफ होनी चाहिए’, जबकि संसद से केवल आधा किलोमीटर दूर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाई गईं।
राहुल गांधी ने कहा था, ‘‘मैं खुद उन घायल बच्चों से मिला हूं। हज़ारों वीडियो देश ने देखे हैं। इस सरकार का मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा है। पहले बच्चों पर लाठी चलाओ, फिर बोल दो कि कुछ हुआ ही नहीं।’’
रीजीजू ने राहुल गांधी को दिये जवाब में कहा कि 18 अक्टूबर, 1976 को उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में जबरन नसबंदी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने गोली चलाई थी।
उन्होंने दावा किया कि कई ऐतिहासिक वृत्तांतों में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की बात कही गई है, और कुछ स्रोतों के अनुसार मरने वालों की संख्या लगभग 50 थी।
रीजीजू ने कहा कि 1972 में पंजाब के मोगा में सिनेमा टिकटों की कथित कालाबाजारी के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें छात्रों और राहगीरों समेत चार लोगों की मौत हो गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1973-74 में गुजरात में छात्रों के नेतृत्व वाले ‘नव निर्माण आंदोलन’ में 103 लोगों की मौत का जिक्र है, जिनमें से 88 मौतें पुलिस की गोलीबारी के कारण हुईं।
उन्होंने कहा कि 1998 में मध्य प्रदेश में मुलताई किसान आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों पर गोली चलाई थी। मंत्री के अनुसार शुरुआती खबरों में मरने वालों की संख्या 17 बताई गई थी, जबकि बाद की जानकारी के अनुसार मरने वाले किसानों की कुल संख्या 24 थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
रीजीजू ने कहा कि 2007 में आंध्र प्रदेश में मुदिगोंडा भूमि आंदोलन के दौरान खबरों के मुताबिक पुलिस की गोलीबारी में आठ लोगों की मौत हुई थी और 16 लोग घायल हुए थे।
उन्होंने कहा कि 2010 में सोमपेटा (आंध्र प्रदेश) में पुलिस की गोलीबारी में दो मछुआरों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 100 लोग घायल हो गए थे।
मंत्री ने बताया कि 2011 में आंध्र प्रदेश में हुई काकरापल्ली गोलीबारी की घटना के बारे में मिली खबरों से ज्ञात होता है कि पुलिस की गोली से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
उन्होंने कहा कि एक तथ्य अन्वेषण रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 साल पहले दक्षिणी राज्य में रबर की गोलियों और असली गोलियों, दोनों का इस्तेमाल किया गया था।
रीजीजू ने 2011 में महाराष्ट्र में जैतपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोध के दौरान हुई गोलीबारी की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 18 अप्रैल 2011 को पुलिस की गोलीबारी में एक प्रदर्शनकारी, तबरेज सयेकर (जिन्हें तवरेज़ सेजकर भी बताया गया है) की मौत हो गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस के शासनकाल में पुलिस गोलीबारी की कई और घटनाएं हुई थीं। ये घटनाएं उन बड़े विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों का सिलसिलेवार ब्योरा देती हैं, जिनमें कांग्रेस सरकारों के सत्ता में रहने के दौरान पुलिस गोलीबारी या पुलिस की कार्रवाई से मौतें हुईं। हमारी सरकार सभी आंदोलनों में अधिकतम संयम बरत रही है।’’
भाषा धीरज वैभव
वैभव

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