नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले जहाजों के पारगमन के लिए भारत का ईरान के साथ कोई ‘‘पूर्व निर्धारित समझौता’’ नहीं है और ‘‘प्रत्येक जहाज की आवाजाही एक अलग घटना है।’’
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि नयी दिल्ली और तेहरान के बीच हुई बातचीत के परिणामस्वरूप भारतीय ध्वज वाले दो टैंकर इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजर सके हैं।
ब्रसेल्स में दिए गए साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा, ‘‘मैं इस समय उनसे (ईरान) बातचीत कर रहा हूं और मेरी बातचीत से कुछ परिणाम निकले हैं। यह प्रक्रिया जारी है। अगर इससे मुझे परिणाम मिल रहा है, तो मैं स्वाभाविक रूप से आगे भी ऐसा करना जारी रखूंगा।’’
ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। वैश्विक तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है।
पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत है।
जयशंकर ने इस बात से भी इनकार किया कि भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को गुजरने देने के बदले में ईरान को कुछ दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह लेन-देन का मामला नहीं है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘भारत और ईरान के बीच संबंध हैं, और यह एक ऐसा संघर्ष है जिसे हम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।’’
भाषा शफीक नरेश
नरेश