नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की ‘ओएमआर शीट’ में कोई छेड़छाड़ नहीं : सरकार

नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की ‘ओएमआर शीट’ में कोई छेड़छाड़ नहीं : सरकार

नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की ‘ओएमआर शीट’ में कोई छेड़छाड़ नहीं : सरकार
Modified Date: August 19, 2026 / 09:03 pm IST
Published Date: August 19, 2026 9:03 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) की पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों की ‘ओएमआर शीट’ में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या हेरफेर नहीं हुई है। मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि पुनर्परीक्षा में ‘‘बड़े पैमाने पर हेरफेर’’ के आरोप वाले लचर तर्कों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे अनावश्यक विमर्श बनता है।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘किसी भी ओएमआर शीट से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।’’

उच्च न्यायालय दो नीट-यूजी उम्मीदवारों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें उन्होंने खुद के साथ-साथ ‘‘प्रभावित उम्मीदवारों’ के लिए हटाए गए कुछ प्रश्नों के लिए अतिरिक्त अंक देने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं में से एक ने यह आरोप भी लगाया था कि उसकी ‘ओएमआर शीट’ से छेड़छाड़ की गई है।

इस याचिका में याचिकाकर्ताओं द्वारा परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर उठाई गई चिंताओं पर गौर करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन की भी मांग की गई थी।

मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला प्रश्न पत्र पर किए गए ‘रफ वर्क’ और ओएमआर शीट पर चिह्नित किए गए उत्तर के बीच विसंगति का लगता है, और इसमें कोई हेरफेर नहीं हुई है।

उन्होंने सवाल किया, ‘वे कहते हैं कि ओएमआर शीट से छेड़छाड़ हुई है। कौन छेड़छाड़ करेगा?’

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि याचिका में उठाए गए ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और हटाए गए प्रश्नों के अंक न मिलने के मुद्दे हजारों उम्मीदवारों से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि केवल दो उम्मीदवार ही याचिका दायर करने आगे आए क्योंकि बाकी को उनके माता-पिता ने इसकी अनुमति नहीं दी।

पीठ ने जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें ऐसी राहत मांगी गई है जो प्रदान नहीं की जा सकती।

अदालत ने कहा कि यदि कोई पीड़ित छात्र व्यक्तिगत तौर पर संपर्क करता है, तो वह इन मुद्दों पर विचार करेगी, न कि किसी जनहित याचिका के रूप में।

अदालत ने कहा, ‘यह याचिकाओं का एक मिला-जुला रूप है जिसमें याचिकाकर्ता और अन्य सभी उम्मीदवारों के लिए राहत की मांग की गई है। ऐसी मिश्रित मांगों वाली रिट याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।’

इसके साथ ही अदालत ने याचिका को वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने एक याचिकाकर्ता को नीट जैसी सार्वजनिक परीक्षाओं में संस्थागत सुधारों पर एक अलग जनहित याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी, जबकि दूसरी उम्मीदवार को ओएमआर शीट में हेरफेर के अपने आरोपों के संबंध में अलग से याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान की।

भाषा सुमित अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में