नोएडा की डीएम अपने वेतन से छात्रा को पांच लाख रुपये देने के निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायलय पहुंची

नोएडा की डीएम अपने वेतन से छात्रा को पांच लाख रुपये देने के निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायलय पहुंची

नोएडा की डीएम अपने वेतन से छात्रा को पांच लाख रुपये देने के निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायलय पहुंची
Modified Date: September 13, 2026 / 03:30 pm IST
Published Date: September 13, 2026 3:30 pm IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिसमें नोएडा में अप्रैल में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लेने के मामले में उनके वेतन से पांच लाख रुपये की मुआवजा राशि काटने का निर्देश दिया गया था।

दो सितंबर को उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय सेइतिहास में स्नातक की पढ़ाई कर चुकी छात्रा आकृति चौधरी (25) की हिरासत रद्द कर दी थी।

चौधरी को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था।

उच्च न्यायालय ने चौधरी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को मंजूर करते हुए कहा था कि उनकी हिरासत राज्य सरकार की ओर से ‘गढ़ी गई’ कहानी पर आधारित थी।

अदालत ने रूपम द्वारा पारित किए गए हिरासत आदेश के तौर-तरीकों की कड़ी आलोचना की थी और चेतावनी दी थी कि ‘लापरवाह’ नौकरशाही का लगातार ‘मनमाना’ रवैया उत्तर प्रदेश को एक ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ में बदल सकता है।

जब किसी शासन व्यवस्था या प्रशासन में नौकरशाही इतनी निरंकुश और दमनकारी हो जाए कि वह नागरिकों के अधिकारों को कुचलने लगे, तो उसे ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ कहा जाता है।

अदालत ने चौधरी को पांच लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया और निर्देश दिया कि यह राशि हिरासत आदेश पारित करने वाली रूपम तथा थाना प्रभारी तक इसके लिए ज़िम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाए।

अदालत ने कहा था कि अगर किसी दूसरे मामले में चौधरी की गिरफ्तारी जरूरी नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप


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