श्रीनगर, 12 मार्च (भाषा) एक स्थानीय अदालत ने बृहस्पतिवार को जम्मू- कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को वापस ले लिया।
अदालत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष अब्दुल्ला पर एक दिन पहले हुए जानलेवा हमले की घटना के मद्देनजर वारंट को वापस ले लिया।
इससे पहले श्रीनगर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तबस्सुम ने वारंट जारी किया था, क्योंकि अब्दुल्ला व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन माध्यम से अदालत में पेश नहीं हो सके।
अब्दुल्ला के वकील, इश्तियाक खान ने हालांकि वारंट को वापस लेने का अनुरोध करते हुए एक आवेदन दायर किया, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री के चिकित्सा सलाहकारों ने उन्हें कल रात जम्मू में उन पर हुए जानलेवा हमले के बाद किसी भी प्रकार की यात्रा न करने की सलाह दी थी।
वकील ने आवदेन में कहा, ‘‘हालांकि आवेदक हमले में बच गये, लेकिन शारीरिक और मनोवैज्ञानिक आघात के कारण उनकी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं, जिनमें रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और हृदय संबंधी परेशानी शामिल हैं, गंभीर रूप से बिगड़ गई हैं।’’
खान ने कहा कि हमले के बाद अब्दुल्ला को कड़ी चिकित्सा निगरानी और ‘‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’’ के तहत रखा गया है।
उन्होंने कहा, “उनके चिकित्सा सलाहकारों ने किसी भी प्रकार की यात्रा, विशेष रूप से जम्मू और श्रीनगर के बीच हवाई या सड़क यात्रा, पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि इससे उनके जीवन और स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। इन अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण, आवेदक आज इस माननीय न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके।”
इससे पहले मजिस्ट्रेट ने अदालत में पेशी से छूट मांगने के अनुरोध संबंधी अब्दुल्ला की याचिका को भी खारिज कर दिया था।
अदालत ने एक अन्य आरोपी मंजूर गजनफर अली की छूट संबंधी अर्जी भी खारिज कर दी और उनके खिलाफ भी गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च की तारीख तय की गई।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
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