केंद्र के ‘वंदे मातरम्’ से संबंधित निर्देश के खिलाफ एनएसएफ ने कोहिमा में निकाली रैली

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केंद्र के ‘वंदे मातरम्’ से संबंधित निर्देश के खिलाफ एनएसएफ ने कोहिमा में निकाली रैली

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 04:47 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 04:47 PM IST

कोहिमा, 16 मार्च (भाषा) नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के बैनर तले हजारों छात्रों और नागरिकों ने सोमवार को यहां रैली निकालकर केंद्र सरकार के उस निर्देश का विरोध किया, जिसमें राज्य सरकार को सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य करने के लिए कहा गया है।

रैली में शामिल लोगों ने “गृह मंत्रालय का 28 जनवरी का निर्देश धर्मनिरपेक्षता पर हमला है”, “नगा अधिकारों से समझौता नहीं होगा”, “जबरन नीतियां बंद करो” और “यह निर्देश हमारी आस्था पर सीधा हमला है” जैसे संदेश वाली तख्तियां हाथों में ले रखी थीं। प्रदर्शनकारियों ने कोहिमा टाउन से लोकभवन तक मार्च किया।

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक ज्ञापन नगालैंड के राज्यपाल को सौंपा।

ज्ञापन में एनएसएफ ने सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ बजाने या गाने को अनिवार्य करने तथा शैक्षणिक संस्थानों में इसके अनिवार्य पालन से जुड़े निर्देश का कड़ा विरोध किया।

सभा को संबोधित करते हुए एनएसएफ के अध्यक्ष मतेइसुदिंग हेरांग ने कहा कि यह रैली इस बात की सामूहिक अभिव्यक्ति है कि नगा लोगों की पहचान और आस्था को प्रशासनिक निर्देशों के जरिए तय नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी देश या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन प्रतीकात्मक प्रथाओं को थोपने के सिद्धांत के खिलाफ है, जो लोगों की अंतरात्मा से टकराती हैं।

हेरांग ने कहा कि विविधता और सह-अस्तित्व का सम्मान हमेशा से नगा समाज की पहचान रहा है, जहां विभिन्न आस्थाओं और समुदायों के लोग शांतिपूर्वक साथ-साथ रहते आए हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के अनिवार्य पालन का मुद्दा धर्मनिरपेक्षता और आस्था की स्वतंत्रता से जुड़े बुनियादी सवाल खड़े करता है।

एनएसएफ ने राष्ट्रपति से नगा क्षेत्र में सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम के गायन को अनिवार्य बनाने वाले निर्देश को वापस लेने की मांग की।

साथ ही संगठन ने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को प्रभावित करने वाली नीतियों को लागू करने से पहले नगा समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ संवाद और परामर्श किया जाना चाहिए।

भाषा रंजन दिलीप

दिलीप