निर्बाध रूप से मुकदमा दर्ज करने की नीति के चलते दुष्कर्म के दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी : अधिकारी

निर्बाध रूप से मुकदमा दर्ज करने की नीति के चलते दुष्कर्म के दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी : अधिकारी

निर्बाध रूप से मुकदमा दर्ज करने की नीति के चलते दुष्कर्म के दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी : अधिकारी
Modified Date: November 29, 2022 / 07:45 pm IST
Published Date: September 1, 2022 8:49 pm IST

जयपुर, एक सितंबर (भाषा) राजस्‍थान के एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि राज्य में दुष्कर्म के दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने की एक प्रमुख वजह ‘निर्बाध तरीके से मुकदमा दर्ज करने की नीति’ लागू होना है, जिसके तहत मामलों को दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

अधिकारी ने यह भी दावा किया कि नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा की दृष्टि से राजस्थान तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम एवं जांच पर राजस्थान पुलिस द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला अत्याचार से संबंधित प्रकरणों में जांच में लगने वाला औसत समय भी घटा है।

अधिकारी ने कहा कि राज्य में महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों की गुणवत्तापूर्ण जांच एवं प्रभावी परीक्षण के लिए राज्य के सभी पुलिस जिलों में ‘स्पेशल यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट वूमेन’ का गठन किया गया है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में देश में बलात्‍कार के सबसे अधिक मामले राजस्‍थान में दर्ज किए गए और इनकी संख्या पूर्व वर्ष (2020) की तुलना में 19 प्रतिशत से अधिक रही।

इसके अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान दूसरे स्थान पर है जबकि बलात्कार के दर्ज मामलों में यह देश में पहले स्थान पर है।

मेहरड़ा ने इस ओर इशारा करते हुए एक बयान में कहा,‘‘महिलाओं खासकर नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा की दृष्टि से राजस्थान देश में बेहतर स्थान पर है। हालांकि, 18 वर्ष से ऊपर की युवतियों व महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाओं की दृष्टि से राजस्थान में एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार जरूर अधिक प्रकरण दर्ज हुए है, लेकिन उसका प्रमुख कारण निर्बाध पंजीकरण (मुकदमा दर्ज) की नीति का अपनाया जाना है।’’

उन्‍होंने कहा कि राज्‍य के सभी पुलिस थानों पर संचालित ‘महिला हेल्प डेस्क’ पर पीड़िता को सुविधाजनक एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, इससे वह बेहिचक अपनी पीड़ा बता पा रही है।

मेहरड़ा ने बताया कि नाबालिग बच्चियों के विरुद्ध दर्ज होने वाले पॉक्सो अधिनियम के मुकदमों में राजस्थान पूरे देश में 12वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए राजस्थान में पुलिस विभाग द्वारा बनाया गया सुरक्षित वातावरण है।

भाषा पृथ्‍वी

अर्पणा शफीक

शफीक


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