OBC Reservation in West Bengal Latest News: भाजपा सरकार ने ओबीसी आरक्षण में की कटौती, अब मिलेगा महज 7 प्रतिशत आरक्षण, विधानसभा में संशोधन विधेयक पास

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OBC Reservation in West Bengal Latest News: भाजपा सरकार ने ओबीसी आरक्षण में की कटौती, अब मिलेगा महज 7 प्रतिशत आरक्षण, विधानसभा में संशोधन विधेयक पास

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 01:19 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 01:49 PM IST

OBC Reservation in West Bengal Latest News: भाजपा सरकार ने ओबीसी आरक्षण में की कटौती, अब मिलेगा महज 7 प्रतिशत आरक्षण, विधानसभा में संशोधन विधेयक पास / Image: AI generated

HIGHLIGHTS
  • ओबीसी आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित
  • ओबीसी आरक्षण 17% से घटाकर 7% किया गया
  • संशोधन कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप किए गए

कोलकाता: OBC Reservation in West Bengal Latest News पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत समुदायों के आरक्षण से जुड़े तृणमूल कांग्रेस सरकार के 2012 के अधिनियम में संशोधन करने वाले दो विधेयक सोमवार को पारित कर दिए। पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026 और पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आरक्षण ढांचे को 17 फीसदी से घटाकर सात प्रतिशत करते हुए 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान किया गया है। ये विधेयक विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी विधायकों के सदन से बहिर्गमन करने के बीच पारित किए गए। कुल 186 विधायकों ने दोनों विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि 17 ने इनके विरोध में वोट दिया। छह सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

ओबीसी वर्ग को अब 7 प्रतिशत आरक्षण

OBC Reservation in West Bengal Latest News विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी के अनुरोध पर मत विभाजन का आदेश दिया। सिद्दीकी और तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक बिश्वनाथ दास ने पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय के उल्लंघन का हवाला देते हुए दोनों विधेयक का विरोध किया और उन्हें प्रवर समिति के पास भेजने का आग्रह किया। पश्चिम बंगाल के पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरीशंकर घोष ने दोनों विधेयक को पेश करते हुए कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार काम कर रही है और संशोधनों के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है।

12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द

घोष ने सदन से कहा, “हमने बिना किसी क्षेत्रीय सर्वेक्षण के पहले शामिल किए गए 113 समुदायों को हटा दिया है, जबकि 66 उप-समुदायों को बरकरार रखा है, जिन्हें विभिन्न सर्वेक्षणों के बाद शामिल किया गया था।” उन्होंने कहा, “पिछड़ा वर्ग आयोग जांच करेगा और अगर उसे लगता है कि किसी समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए, तो वह राज्य सरकार के विचारार्थ सिफारिशें दे सकता है। पिछली सरकार ने आयोग को दरकिनार कर दिया था, इसीलिए उच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को रद्द कर दिया।” मई 2024 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मुख्य रूप से 2010 से 2012 के बीच शामिल किए गए 77 अतिरिक्त समुदायों को जारी ओबीसी दर्जा और लगभग 12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द कर दिए थे। अदालत ने इन समुदायों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने के फैसले को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। उसने कहा था कि 2010 से पहले जारी किए गए ओबीसी प्रमाण पत्र वैध बने रहेंगे।

कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं

राज्य सरकार ने 19 मई को धर्म आधारित वर्गीकरण योजनाओं को समाप्त कर दिया और 2010 से पहले राज्य की ओबीसी आरक्षण सूची में शामिल 66 समुदायों को नियमित कर दिया, जिससे सात प्रतिशत कोटा के लिए उनकी पात्रता बहाल हो गई। सोमवार को किए गए संशोधनों ने राज्य सरकार को आयोग के परामर्श से विभिन्न ओबीसी श्रेणियों के लिए आरक्षण प्रतिशत निर्धारित करने का अधिकार प्रदान करते हुए राज्य मंत्रिमंडल के इस कदम को कानूनी मंजूरी भी प्रदान की। पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026 में कहा गया है कि आरक्षित पदों का प्रतिशत आरक्षण कोटा के अनुपात में समय-समय पर संशोधित किया जा सकता है, लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

ओबीसी आयोग करेगा जांच

इसमें कहा गया है कि आयोग से परामर्श करने के बाद राज्य सरकार को ओबीसी नागरिकों को उनके सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करने का अधिकार होगा, जिसके बाद प्रत्येक श्रेणी के लिए पदों में आरक्षण अलग से प्रदान किया जाएगा। पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 में कहा गया है कि नागरिक ओबीसी सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिसके बाद आयोग ऐसे आवेदनों की जांच करेगा और राज्य सरकार को सिफारिशें देगा। इसमें कहा गया है कि ओबीसी सूची में किसी भी समुदाय के अत्यधिक या अपर्याप्त समावेश से संबंधित शिकायतें भी पेश की जा सकती हैं और ऐसे मामलों में सरकार आयोग की सिफारिशों के अनुसार कदम उठाएगी। विधेयक के मुताबिक, आयोग के सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा, लेकिन सदस्य-सचिव का कार्यकाल सरकार की ओर से तय किया जाएगा, जो सेवारत सरकारी अधिकारी होगा। तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता गुट के कई विधायकों ने विधेयकों पर मतदान से पहले सदन से बहर्गमन कर दिया। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में शामिल विधायकों ने विधेयकों पर हुए मतदान में हिस्सा लिया।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा ने कौन-से विधेयक पारित किए हैं?

विधानसभा ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित West Bengal Backward Classes (Reservation of Vacancies in Services and Posts) (Amendment) Bill, 2026 और West Bengal Backward Classes Commission (Amendment) Bill, 2026 पारित किए हैं।

नए संशोधन के बाद ओबीसी आरक्षण में क्या बदलाव हुआ है?

संशोधन के तहत 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करते हुए आरक्षण का ढांचा 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है।

सरकार ने यह संशोधन क्यों किया है?

राज्य सरकार के अनुसार, यह संशोधन कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने और आरक्षण व्यवस्था को कानूनी रूप से व्यवस्थित करने के लिए किया गया है।

ओबीसी आयोग की क्या भूमिका होगी?

ओबीसी आयोग नए समुदायों के आवेदन, सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन की जांच करेगा और अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को देगा।

क्या कुल आरक्षण की कोई सीमा तय की गई है?

हां। संशोधित कानून के अनुसार राज्य में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।