Reported By: Jitendra Thawait
,Bilaspur new nagar nigam arpa par || Image- IBC24 News File
बिलासपुर: शहर के अरपा नदी के उस पार बसे इलाकों के विकास को लेकर एक बार फिर नए नगर निगम की मांग ने जोर पकड़ लिया है। नगर निगम के 70 वार्डों में से 28 वार्ड अरपापार क्षेत्र में आते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबादी और शहरी विस्तार तेजी से बढ़ने के बावजूद विकास के मामले में अरपापार को अपेक्षित तवज्जो नहीं मिल रही। (Bilaspur new nagar nigam arpa par) अब लोगों ने चेतावनी दी है कि 1 सितंबर तक नए नगर निगम को लेकर फैसला नहीं हुआ तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। वहीं इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासत भी तेज हो गई है।
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अरपापार अब ग्रामीण इलाकों से निकलकर तेजी से अर्बन ग्रोथ की तरफ बढ़ रहा है। 15 से ज्यादा पंचायतों के निगम में शामिल होने के बाद इस क्षेत्र में 28 वार्ड हो गए हैं। इस क्षेत्र में बढ़ती आबादी के हिसाब से सड़क, नाली, पानी, सफाई और दूसरी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम के कुल बजट का 20 से 30 फीसदी हिस्सा अरपापार के विकास पर खर्च होना भी मौजूदा जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि बिलासपुर का विकास मुख्य शहर तक ही सीमित रह गया है। यही वजह है कि अब अरपापार के लिए अलग प्रशासनिक ढांचे और नए नगर निगम की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि 1 सितंबर तक मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो आमरण अनशन किया जाएगा
नगर निगम के परिसीमन के दौरान कांग्रेस कार्यकाल में ग्रामीण इलाकों को निगम में शामिल किया गया था और इसके बाद बिलासपुर नगर निगम में कुल 70 वार्ड बने जिनमें 28 वार्ड अरपा नदी के पार हैं। बीते विधानसभा चुनाव में बिलासपुर के साथ अरपापार एक नये नगर निगम का निर्माण चुनाव का एक प्रमुख मुद्दा था। (Bilaspur new nagar nigam arpa par) बिलासपुर से बीजेपी के जीते हुए प्रत्याशी और छत्तीसगढ़ शासन में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने अपनी घोषणा पत्र में भी इसे स्थान दिया। यही वजह है कि स्थानीय लोगों की मांग के साथ ही अब सियासत भी शुरू हो गई है।
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार पहले से मौजूद बिलासपुर नगर निगम को ही संभालने में नाकाम है ऐसे में नया नगर निगम बनाना कहीं न कहीं नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। कांग्रेस का कहना है कि नया निगम बनाने की बजाय मौजूदा निगम के जरिए ही अरपापार के विकास पर फोकस किया जाना चाहिए। वहीं बीजेपी विधायक का कहना है कि नया नगर निगम कोई जल्दबाजी में लिया जाने वाला फैसला नहीं है। इसके लिए आबादी, संसाधन, प्रशासनिक जरूरत और आर्थिक स्थिति समेत तमाम पहलुओं का पर्याप्त अध्ययन जरूरी है।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर इसे फिलहाल नीतिगत फैसला माना जा रहा है। अब नए नगर निगम की मांग पर अंतिम फैसला सरकार के स्तर से ही होना है। (Bilaspur new nagar nigam arpa par) प्रशासनिक ढांचे के विस्तार, संसाधनों की उपलब्धता और क्षेत्र की जरूरतों का आकलन करने के बाद ही इस पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। ऐसे में फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर सरकार के फैसले पर टिकी है।
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अरपापार अब बिलासपुर के विस्तार का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन विकास की रफ्तार आज भी उसकी जरूरतों के मुकाबले काफी धीमी है। ऐसे में सवाल सिर्फ सड़क, नाली और बिजली का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को उसकी आबादी और बढ़ते शहरी दबाव के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं देने का है। अब देखना होगा कि प्रशासन अरपापार की इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है और विकास के लिए बजट और बड़े प्रशासनिक ढांचे का इंतजाम कब तक करता है।
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