भुवनेश्वर, 16 मार्च (भाषा) ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए जारी मतदान के दौरान सोमवार को विपक्षी दलों बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के कम से कम पांच विधायकों ने कथित तौर पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया।
प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 12 वर्ष के अंतराल के बाद हो रहे हैं। इस बार चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्यसभा के चार सदस्यों का कार्यकाल दो अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी के तीन विधायकों-रमेश जेना, दसरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस ने “भाजपा के पक्ष में मतदान किया है।”
वहीं, बीजद के बांकी से विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने भी घोषणा की कि उन्होंने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है।
त्रिपाठी ने कहा, “मैं कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के हमारी पार्टी के फैसले का विरोध करता हूं। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को वोट देने का मेरा निर्णय बीजू पटनायक की उस राजनीतिक विरासत के अनुरूप है, जिन्होंने हमेशा कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष किया।”
इस बीच, बीजद विधायक सौविक बिस्वाल की पत्नी डॉ. अनन्या प्रियदर्शिनी ने दावा किया कि उनके पति ने भी दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया है।
अनन्या ने कहा, “मेरे पति ने पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान किया है, क्योंकि हाल ही में मेरे ससुर पी बिस्वाल को बीजद से निष्कासित कर दिया गया था। पार्टी के भीतर उनका अपमान किया गया। मेरे पति ‘मौन व्रत’ पर हैं और उन्होंने बीजद के लिए कड़ी मेहनत की है, लेकिन उनकी लगातार उपेक्षा की गई।’’
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा, “मैं पहले ही कह चुका हूं कि भाजपा और उसके सहयोगी ‘खरीद फरोख्त’ में शामिल होंगे। जिन विपक्षी सदस्यों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है, उनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं और वे जेल भी जा चुके हैं।”
इस चुनाव में भाजपा के दो उम्मीदवार हैं जिनमें पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और वर्तमान राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार शामिल हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है।
दूसरी ओर, बीजद ने पार्टी नेता संतृप्त मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें कांग्रेस और माकपा का समर्थन प्राप्त है।
चौथी सीट को लेकर ‘क्रॉस-वोटिंग’ की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि न तो सत्तारूढ़ भाजपा और न ही विपक्षी बीजद के पास अपने दम पर इस सीट को जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है।
ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के पास 48 सदस्य रह गए हैं। कांग्रेस के 14 विधायक हैं, जबकि माकपा का एक विधायक है।
ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के गणित के अनुसार, किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए 30 प्रथम वरीयता वोट की आवश्यकता होती है। भाजपा के पास कुल 82 सदस्यों का समर्थन होने के कारण अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद उसके पास 22 अतिरिक्त वोट बचेंगे। इसी तरह बीजद अपने एक उम्मीदवार को जिताने के बाद उसके पास 18 अतिरिक्त वोट होंगे।
भाषा रंजन नेत्रपाल
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