अन्नाद्रमुक ने जो 47 सीटें जीती हैं उनमें 31 सीटें पीएमके की दी हुई ‘खैरात’ हैं : सी वी षणमुगम

अन्नाद्रमुक ने जो 47 सीटें जीती हैं उनमें 31 सीटें पीएमके की दी हुई ‘खैरात’ हैं : सी वी षणमुगम

अन्नाद्रमुक ने जो 47 सीटें जीती हैं उनमें 31 सीटें पीएमके की दी हुई ‘खैरात’ हैं : सी वी षणमुगम
Modified Date: June 14, 2026 / 04:58 pm IST
Published Date: June 14, 2026 4:58 pm IST

तिंदीवनम (तमिलनाडु), 14 जून (भाषा) अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी को निशाने पर लेते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता सी.वी. षणमुगम ने रविवार को दावा किया कि उत्तरी इलाकों में पार्टी का चुनावी अस्तित्व पूरी तरह से उसके सहयोगी दलों पर निर्भर है।

उन्होंने वहां अन्नाद्रमुक द्वारा जीती गई सीटों को ‘‘पीएमके की ओर से दी गई खैरात’’ बताया।

पार्टी की लगातार चुनावी हार के बाद पलानीस्वामी के खिलाफ खुली बगावत करते हुए, पूर्व मंत्री षणमुगम ने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व ने पार्टी को व्यक्तिगत अहंकार, पारिवारिक प्रभाव और वित्तीय हितों से प्रेरित होकर ‘‘तानाशाही की ओर’’ धकेल दिया है।

षणमुमग ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘वे (पार्टी के शीर्ष नेता) बेशर्मी से 47 सीटों पर जीत का दावा करते हैं। इसे जीत कैसे कहा जा सकता है? उन 47 सीटों में से 31 सीटें तो पट्टालि मक्कल काची (पीएमके) की तरफ से खैरात में मिली हैं।’’

उन्होंने कहा कि अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाली पीएमके के साथ गठबंधन के बिना, अन्नाद्रमुक को अहम उत्तरी इलाके में एक भी सीट नहीं मिलती।

उन्होंने यह भी कहा कि पलानीस्वामी के लिए खुद अपने गढ़ को बचाए रखना भी मुश्किल हो जाता।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर पीएमके के साथ गठबंधन न होता, तो अन्नाद्रमुक को अरियालुर, कुड्डालोर, विल्लुपुरम, कल्लाकुरिची, तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, धर्मपुरी और यहां तक ​​कि सलेम जैसे उत्तरी ज़िलों में जीत हासिल करने में मुश्किल होती या फिर उसे भारी हार का सामना करना पड़ता।’’

पलानीस्वामी के काम करने के तरीके की आलोचना करते हुए, वरिष्ठ नेता षणमुगम ने आरोप लगाया कि द्रमुक-विरोधी भावना की नींव पर एमजी रामचंद्रन द्वारा खड़ी की गयी पार्टी अपनी मुख्य वैचारिक पहचान खो रही है।

निराश होकर पार्टी छोड़ रहे समर्पित कार्यकर्ताओं को ‘‘गद्दार’’ कहने पर षणमुगम ने पलानीस्वामी की तीखी आलोचना की।

पार्टी के इतिहास का उल्लेख करते हुए षणमुगम ने पूछा कि क्या केवल द्रमुक नेतृत्व द्वारा दशकों पहले पार्टी से निकाले जाने पर ‘गद्दार’ कह देने भर से पार्टी के संस्थापक एमजीआर वास्तव में गद्दार हो गए।

उन्होंने कहा, ‘‘जब एमजीआर को द्रमुक से निकाला गया था, तब उन्हें गद्दार कहा गया था। तो क्या इससे एमजीआर गद्दार बन गए? द्रमुक की जीतों के पीछे सबसे बड़ा कारण वही थे। सी. एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के मुख्यमंत्री बनने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।’’

भाषा शफीक राजकुमार

राजकुमार


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