केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव खर्च पर कॉजपा ने कहा – आलीशान घरों की नहीं, विद्यालयों की हालत सुधारें’

केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव खर्च पर कॉजपा ने कहा - आलीशान घरों की नहीं, विद्यालयों की हालत सुधारें’

केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव खर्च पर कॉजपा ने कहा – आलीशान घरों की नहीं, विद्यालयों की हालत सुधारें’
Modified Date: August 24, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: August 24, 2026 3:56 pm IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने केंद्र सरकार पर अपनी प्राथमिकताएं दुरुस्त नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले वित्त वर्ष केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों के रखरखाव पर खर्च किए गए रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये से 10 नए सरकारी स्कूल बनाए जा सकते थे।

कॉजपा ने औपनिवेशिक काल के इन बंगलों के रखरखाव के बढ़ते खर्च से संबंधित ‘पीटीआई-भाषा’ की एक खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अपने आलीशान घरों का रखरखाव बंद कीजिए और विद्यालयों की हालत सुधारिए।’’

कॉजपा ने पोस्ट में कहा, ‘‘92 करोड़ रुपये यानी 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल। पैसा उपलब्ध है, लेकिन उसे सरकारी विद्यालयों पर खर्च करने की मंशा नहीं है।’’

अभिजीत दीपके ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की ‘‘कॉकरोच’’ संबंधी टिप्पणी की व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर मई में कॉजपा की स्थापना की थी। इसके बाद कॉजपा बेरोजगारी और परीक्षाओं में अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित एक व्यापक युवा आंदोलन के रूप में उभरी है।

कॉजपा का हालिया अभियान सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर केंद्रित है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में ‘पीटीआई’ को मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों के नवीनीकरण, साज-सज्जा और मरम्मत पर खर्च 2014-15 के 27.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये हो गया।

इन आवासों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने 2014-15 से 2025-26 तक 12 वर्ष में इन कार्यों पर कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए।

हाल के वर्षों में यह खर्च तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014-15 से 2018-19 के बीच इस पर औसतन 26.78 करोड़ रुपये सालाना खर्च हुए और 2019-20 से 2023-24 के बीच यह खर्च लगभग दोगुना होकर करीब 50 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद यह 2024-25 में बढ़कर 71.98 करोड़ रुपये और पिछले वित्त वर्ष में 92.35 करोड़ रुपये पहुंच गया।

अधिकारियों ने बढ़े हुए खर्च के लिए पुराने बंगलों के रखरखाव की लागत को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें से कई बंगले 80 से 100 साल पुराने हैं और उनमें सीलन, दीमक तथा पुरानी विद्युत एवं पाइपलाइन व्यवस्था जैसी समस्याएं हैं।

इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता एवं दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने इस खर्च की तुलना अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहते उनके आधिकारिक आवास के निर्माण और नवीनीकरण को लेकर हुए विवाद से की।

भारती ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘गोदी मीडिया मोदी सरकार के मंत्रियों के घरों की मरम्मत पर 92 करोड़ रुपये के इस खर्च पर बहस क्यों नहीं करता, जबकि उसने मुख्यमंत्री आवास के निर्माण को लेकर केजरीवाल सरकार की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी?’’

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित पूर्व आधिकारिक आवास पर हुए खर्च को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया था।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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