दिल्ली में रोजाना निकल रहे कचरे का केवल 63 प्रतिशत ही शोधन हो रहा: आर्थिक सर्वेक्षण

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दिल्ली में रोजाना निकल रहे कचरे का केवल 63 प्रतिशत ही शोधन हो रहा: आर्थिक सर्वेक्षण

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  • Publish Date - March 23, 2026 / 08:14 PM IST,
    Updated On - March 23, 2026 / 08:14 PM IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली में प्रतिदिन करीब 11,862 टन ठोस कचरा निकल रहा है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी की कचरा शोधन क्षमता प्रतिदिन 7,641 टन है, जिससे करीब 4,200 टन का बड़ा अंतर बना हुआ है। यह जानकारी दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सामने आई है, जिसे सोमवार को पेश किया गया।

सर्वे के अनुसार, कुल कचरे में से लगभग 11,500 टन दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्रों से, 300 टन नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) क्षेत्रों से और 62 टन दिल्ली छावनी बोर्ड से निकलता है, जिससे शहर की कचरा शोधन और लैंडफिल व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों निकायों में कचरा संग्रहण शत-प्रतिशत तक पहुंच चुका है, यानी शहर का लगभग पूरा कचरा रोजाना उठाया जा रहा है।

हालांकि, कचरा शोधन के स्तर पर दिल्ली की स्थापित क्षमता कुल कचरे का करीब 64.4 प्रतिशत है, जबकि वास्तविक शोधन 62.9 प्रतिशत (लगभग 7,460 टन प्रतिदिन) ही हो पा रहा है।

स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण अब भी असमान है। एनडीएमसी क्षेत्रों में करीब 92 प्रतिशत और छावनी क्षेत्रों में लगभग 90 प्रतिशत पृथक्करण हो रहा है, जबकि एमसीडी क्षेत्रों में यह औसतन 59 प्रतिशत है। इसे जनवरी 2027 तक शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

सर्वे में बताया गया है कि कचरा शोधन में 4,200 टन से अधिक की क्षमता की कमी और वास्तविक कचरा शोधन में करीब 4,401 टन प्रतिदिन का अंतर बना हुआ है।

स्थिति सुधारने के लिए आने वाले वर्षों में कचरा निपटान और शोधन क्षमता में 7,750 टन प्रतिदिन (टीपीडी) की वृद्धि की योजना है। इसके तहत नरेला-बवाना में 3,000 टीपीडी (दिसंबर 2027 तक) और गाजीपुर में 2,000 टीपीडी (दिसंबर 2028 तक) की नई इकाइयां प्रस्तावित हैं।

साथ ही ओखला और तेहखंड संयंत्रों का विस्तार कर उनकी क्षमता क्रमशः 2,950 टीपीडी और 3,000 टीपीडी तक बढ़ाई जाएगी।

सर्वे के मुताबिक, कुछ कचरे का निपटान विकेंद्रीकृत तरीकों से भी हो रहा है, जिसमें 257 कंपोस्ट गड्ढों के जरिये करीब 558 टन और ‘मटेरियल रिकवरी सुविधाओं’ से 293 टन कचरे का पुनर्चक्रण किया जा रहा है।

शहर में ओखला, गाजीपुर, बवाना और तेहखंड स्थित चार ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ संयंत्रों की कुल क्षमता 6,550 टन प्रतिदिन है, जो लगभग 84 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न करते हैं।

सर्वे में निर्माण एवं विध्वंस (मलबा) कचरे के संग्रहण स्थलों की संख्या बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है। एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड के पास क्रमशः 106, 25 और एक संग्रहण स्थल हैं, जबकि एमसीडी 19 नये मलबा स्थलों का विकास कर रहा है।

इन प्रयासों के बावजूद बड़ी मात्रा में बिना शोधन वाले कचरे अब भी लैंडफिल स्थलों पर डाले जा रहे हैं, जिससे मौजूदा ढांचे पर दबाव बना हुआ है और कचरा शोधन क्षमता बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।

सर्वे ने कहा कि दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी तीन स्थानीय निकायों पर है और आने वाले समय में कचरे का पृथक्करण बढ़ाने, कचरा शोधन सुविधाओं का विस्तार करने तथा लैंडफिल पर निर्भरता कम करने के प्रयास जारी हैं।

भाषा राखी सुरेश

सुरेश

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