नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (एस) के नेता एचडी देवेगौड़ा ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि जिस तरह से कांग्रेस सरकार कर्नाटक का शासन चला रही है, ऐसे में राज्य को भगवान ही बचा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राज्य में उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए कुछ कदम उठाने का आग्रह किया।
उच्च सदन में विनियोग विधेयक (संख्या 2) पर चर्चा में भाग लेते हुए देवेगौड़ा ने कहा कि वह ‘‘सत्ता के भूखे नेता नहीं हैं’’ और उन्होंने कुछ लोगों द्वारा अपनी पार्टी के विलय की मांग को खारिज कर दिया था।
उन्होंने विभिन्न दलों के सदस्यों से एलपीजी की कमी को लेकर प्रधानमंत्री पर हमला नहीं करने का आग्रह किया और कहा कि पश्चिम एशिया संकट का समाधान कैसे होना चाहिए, यह केवल प्रधानमंत्री मोदी ही दुनिया को बता सकते हैं।
देवेगौड़ा ने कहा, ‘‘मैं उन मित्रों से अनुरोध करता हूं जो इस गैस (मुद्दे) के कारण सरकार पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं… प्रधानमंत्री ने सभी को सलाह दी है कि राज्यों और भारत सरकार को कैसा व्यवहार करना चाहिए। वह बहुत ही परिपक्व नेता हैं।’’
उन्होंने कर्नाटक में उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए प्रधानमंत्री से कदम उठाने का आग्रह करते हुए कहा, “कर्नाटक के लिए कुछ कीजिए। इस कर्नाटक सरकार की चिंता मत कीजिए।”
देवेगौड़ा ने कहा, “मेरे बेटे ने मुख्यमंत्री रहते हुए कर्नाटक के सात जिलों में औद्योगिक क्लस्टर बनाए। प्रधानमंत्री रहते हुए मैंने इस्पात कारखानों को बचाने के लिए 650 करोड़ रुपये मंजूर किए… मेरे पद छोड़ने के बाद, वहां केवल एक छोटी इकाई बची है।”
उन्होंने कहा, “मैं सदन के नेता से, संसदीय कार्य मंत्री से और प्रधानमंत्री से अपील करता हूँ कि कर्नाटक के लिए कुछ करें। कर्नाटक की स्थिति और हालात इतने खराब क्यों हैं, इस पर ध्यान नहीं दें, जिसका मैं जिक्र नहीं करना चाहता।”
पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने गृह राज्य का जिक्र करते हुए कहा, “कर्नाटक में जो हालात हैं, ऐसे में भगवान ही कर्नाटक को बचा सकते हैं। हमारे महान नेता मोदी साहब के नेतृत्व में देश को बचाएं।”
देवेगौड़ा ने कहा, “मैं सभी वर्गों का आभारी हूं… जिनमें तृणमूल कांग्रेस नेता भी शामिल हैं, जिनके लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। जब कुमारस्वामी ने शपथ ली थी, तब वह सोनिया गांधी जैसे कई बड़े नेताओं के साथ आई थीं। वह सरकार 14 महीनों में गिर गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है… जयराम रमेश से पूछिए।”
भाषा अविनाश नेत्रपाल
नेत्रपाल