यूजीसी-नेट परीक्षा में शामिल छह प्रतिशत अभ्यर्थी ही सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य: सरकार

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यूजीसी-नेट परीक्षा में शामिल छह प्रतिशत अभ्यर्थी ही सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य: सरकार

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 08:37 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 08:37 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) सरकार ने संसद को बताया कि यूजीसी-नेट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों में से छह प्रतिशत ही देशभर के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए योग्य होते हैं और इनमें से हर साल 11,750 अभ्यर्थियों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) दी जाती है।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने सोमवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

थरूर ने नेट परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के आंकड़े मांगने के साथ यह भी पूछा था कि क्या सरकार जेआरएफ की संख्या बढ़ाने या पात्रता मानदंड में बदलाव करने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या मंत्रालय ने इस बात पर गौर किया है कि यूजीसी ‘नॉन-नेट फेलोशिप’ की राशि वर्ष 2006 से अब तक 8,000 रुपये प्रति माह पर ही बनी हुई है।

मजूमदार ने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के आधार पर जेआरएफ प्रदान करता है। नेट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों में से छह प्रतिशत ही सहायक प्राध्यापक के लिए योग्य होते हैं और इन्हीं पात्र अभ्यर्थियों में से यूजीसी हर साल 11,750 को जेआरएफ प्रदान करता है।’’

उन्होंने बताया कि इसके अलावा कई मंत्रालय और संस्थान पीएचडी करने वाले शोधार्थियों की सहायता के लिए अलग-अलग फेलोशिप प्रदान करते हैं। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दिव्यांगों और एकल बालिका को विशेष फेलोशिप भी दी जाती है।

मंत्री ने कहा कि पीएचडी शोधार्थी विभिन्न वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा विश्वविद्यालयों को मंजूर किए गए शोध कार्यों में शामिल होकर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ छात्र बिना किसी आर्थिक सहायता के भी पीएचडी में दाखिला लेते हैं। ऐसे छात्रों की मदद के लिए यूजीसी ने ‘नॉन-नेट फेलोशिप’ के रूप में आंशिक आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है।

थरूर ने सरकार के जवाब पर असंतोष जताया। उन्होंने मंगलवार को ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार ने उनके सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय के जवाब में केवल मौजूदा यूजीसी फेलोशिप व्यवस्था की सामान्य जानकारी दी गई है, लेकिन नेट उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों और जेआरएफ प्राप्त करने वालों के वर्षवार आंकड़े नहीं दिए गए।

थरूर ने कहा कि सरकार ने इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया कि पात्र अभ्यर्थियों और उपलब्ध फेलोशिप के बीच बढ़ते अंतर को कम करने, जेआरएफ की संख्या बढ़ाने या पात्रता नियमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है या नहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि 8,000 रुपये प्रति माह वाली यूजीसी ‘नॉन-नेट फेलोशिप’ राशि को बढ़ाने के मुद्दे पर भी सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है, जबकि 2006 से इसे बढ़ाया नहीं गया है।

थरूर ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा वर्ष 2023 में लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया था, लेकिन सरकार ने अभी तक जेआरएफ में बदलाव को लेकर कोई समयसीमा या आश्वासन नहीं दिया है।

भाषा सुभाष अविनाश नरेश

नरेश