नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने उभयलिंगी समूह के बारे में सरकार द्वारा लाए गए एक विधेयक में अपील करने के प्रावधान का अभाव बताते हुए इसे वापस लेने या व्यापक चर्चा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने का सुझाव दिया।
आम आदमी पार्टी के संदीप कुमार पाठक ने कहा कि इस विधेयक को लेकर उन लोगों से विचार विमर्श करना चाहिए जिनके लिए यह विधेयक लाया जा रहा है।
उच्च सदन में उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2006 पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि इस विधेयक में अपील करने के प्रावधान का अभाव है। उन्होंने कहा ‘‘आपने कहा है कि उभयलिंगी के प्रमाणन के लिए 34 हजार लोगों ने आवेदन दिया जिनमें से 32 हजार को सरकार ने प्रमाणन दिया और 5556 के आवेदन खारिज कर दिए गए। ये लोग कहां अपील करेंगे ?’’
पाठक ने सवाल किया कि क्या यह बात दूसरे लोग बताएंगे कि अमुक व्यक्ति उभयलिंगी है या नहीं ?
बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा कि जब पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है तब सरकार को यह विधेयक लाने की क्या पड़ी थी?
उन्होंने कहा ‘‘सरकार अगर उभयलिंगी समुदाय के लिए कुछ करना चाहती है तो बेहतर योजनाएं बनाए, न कि इस विधेयक के जरिये उनके अधिकारों को वापस ले।’’
सुलता देव ने कहा कि प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ करते हैं लेकिन इस समुदाय को भी तो मन की बात कहने देना चाहिए। उन्होंने विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की फौजिया खान ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है और उभयलिंगी समुदाय के साथ पूरी तरह न्याय होना चाहिए। इस समुदाय के कल्याण के लिए 70 करोड़ रुपये सालाना खर्च करने का दावा किया जाता है लेकिन असलियत यह है कि इस राशि में से केवल 11 फीसदी राशि ही खर्च की गई है।
उन्होंने कहा कि तिरुचि शिवा का निजी विधेयक सदन में पारित हुआ था और वह महत्वपूर्ण था।
शिवसेना (उबाठा) की प्रियंका चतुर्वेदी ने विधेयक को देश के करीब पांच लाख उभयलिंगी लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि अब तक हमारा देश ‘स्व-पहचान’ की बात करता था लेकिन अब उभयलिंगियों से यह अधिकार छीना जा रहा है।
उन्होंने विधेयक का विरोध करते हुए कहा, ‘‘महाकुंभ में किन्नर अखाड़ा भी था लेकिन उस अखाड़े की देखभाल, सुरक्षा और इंतजाम किसने किया या किसने इस बारे में सोचा था? ‘‘किसी ने नहीं। इस समुदाय के लिए कोई सोचता ही नहीं है।’’
आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने कहा कि किन्नर समुदाय को सामाजिक सुरक्षा की जरूरत है और विधेयक में यह बात नहीं दिखती।
चर्चा में झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी ने भी हिस्सा लिया।
भाषा
मनीषा अविनाश
अविनाश