विरोध ही एकमात्र उपाय है: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भाकियू

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विरोध ही एकमात्र उपाय है: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भाकियू

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 06:46 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 06:46 PM IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए मंगलवार को कहा कि संगठन गांवों में इसके विरोध में प्रदर्शन करेगा।

उन्होंने केंद्र सरकार पर किसानों के हितों की रक्षा करने के बारे में झूठ बोलने का आरोप भी लगाया।

टिकैत ने यहां एक जनसभा के इतर आयोजित प्रेसवार्ता में वर्तमान स्थिति की तुलना 1992 की स्थिति से की, जो भारत द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को खोले जाने के तुरंत बाद का समय था।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत-अमेरिका समझौते का जो तरीका अपनाया गया है… वह भारत के लिए खतरनाक साबित होगा… हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।’’

किसान नेता ने कहा, ‘‘यह एकतरफा समझौता है, दबाव का करार है। भारतीय किसानों को यह स्वीकार्य नहीं है। वे सब्सिडी वाले सामान से बाजार को पाट देंगे, हमारे किसान अपनी उपज बेच नहीं पाएंगे।’’

किसानों की सुरक्षा को लेकर सरकार के आश्वासन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘सरकार झूठ बोल रही है… वे कुछ भी दावा कर सकते हैं। विरोध ही एकमात्र उपाय है।’’

टिकैत ने कहा कि किसान गांवों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पुतले जलाएंगे। उन्होंने 12 फरवरी की ‘आम हड़ताल’ को अपना समर्थन भी दिया। उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली ज्यादा दूर नहीं है… हमारे ट्रैक्टर हमेशा तैयार रहते हैं…।’’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लोकसभा सदस्य सुधाकर सिंह ने जोर देकर कहा कि यह समझौता भारत के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यह बराबरी का समझौता नहीं है… भारत 18 प्रतिशत ‘टैरिफ’ दे रहा है, जबकि अमेरिका शून्य ‘टैरिफ’ दे रहा है।’’

उन्होंने प्रस्तावित बीज विधेयक का भी विरोध किया और कहा कि इससे किसानों को महंगे बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

सिंह ने आरोप लगाया, “बीज विधेयक को लेकर इतनी जल्दबाजी का कारण क्या है? यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि व्यापार समझौते में अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों को प्रभावित करने वाले गैर-टैरिफ अवरोधों को हटाने की बात कही गई है। भारत सरकार फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं देना चाहती, बल्कि बीजों पर कंपनियों को मुनाफे की गारंटी देना चाहती है।”

उन्होंने यह भी मांग की कि बीज विधेयक, कीटनाशक प्रबंधन विधेयक और बिजली विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजा जाए।

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने अमेरिकी टैरिफ के पिछले साल तीन फीसदी से बढ़कर 18 प्रतिशत होने पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ‘‘कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलना किसानों के लिए मौत की सजा के समान है…।’’

संजय सिंह ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उसने रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंध स्वीकार करके भारत की संप्रभुता से समझौता किया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक धमकी भरा समझौता है, व्यापार समझौता नहीं।’’

दोनों सांसदों ने जोर देकर कहा कि विपक्ष संसद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध जारी रखेगा।

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव विजू कृष्णन ने इस समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सभी किसान संगठन 12 फरवरी की आम हड़ताल का समर्थन करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने एक बयान में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विवरण पर सवाल उठाया और कहा कि विवरण अब भी ‘‘गोपनीयता के पर्दे के पीछे छिपा हुआ’’ है।

इसने कहा, ‘‘भारत सरकार ने किसान संगठनों से बिना किसी परामर्श के और कृषि तथा किसानों की आजीविका पर इनके प्रभाव को हल किए बिना इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।’’

भाकियू ने भारत-अमेरिका समझौते को ‘‘किसान विरोधी’’ बताया और कहा कि कृषि आयात पर गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने से आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों (जीएमओ) के आयात के द्वार खुल रहे हैं।

इसने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार समझौता भी किसानों के हितों के खिलाफ है। बयान में कहा गया कि कम टैरिफ के बावजूद, भारतीय कृषि निर्यात को यूरोपीय बाजारों में आसानी से पहुंच नहीं मिलेगी क्योंकि वहां स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के सख्त मानक हैं।

भाषा नोमान नेत्रपाल

नेत्रपाल