तिरुवनंतपुरम, दो फरवरी (भाषा) दोषी कैदियों को दी गई पैरोल पर चर्चा की मांग करने वाले स्थगन प्रस्ताव को केरल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा खारिज किए जाने के बाद संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के विधायकों ने सोमवार को सदन के अंदर विरोध प्रदर्शन किया।
स्थगन प्रस्ताव भारतीय क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी के विधायक के के रेमा द्वारा पेश किया गया था जिन्होंने आरोप लगाया कि हाल में सजा पाए दोषियों सहित कई दोषियों को पैरोल दी गई और उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
हालांकि, अध्यक्ष ए एम शमसीर ने प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मुद्दा तत्काल महत्वपूर्ण नहीं है और इसे बाद में भी सदन के पटल पर रखा जा सकता है।
विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने नोटिस की अस्वीकृति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अपराधियों को अवैध रूप से पैरोल दी जा रही है और वे जेल से बाहर निकलकर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा कर रहे हैं।
सतीशन ने कहा कि माकपा नेता और पय्यानूर नगर पार्षद वी के निषाद को पिछले साल दिसंबर में 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी और उसे एक महीने बाद पैरोल दे दी गई।
आरोपों का जवाब देते हुए स्थानीय स्वशासन मंत्री एम बी राजेश ने कहा कि निषाद को आठ जनवरी को पैरोल दी गई थी, लेकिन पिछले महीने विधानसभा सत्र शुरू होने पर यह मुद्दा नहीं उठाया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा में विपक्ष के पास उठाने के लिए विषयों की कमी के कारण ऐसा प्रस्ताव लाया गया है।’’
बाद में विपक्षी विधायकों ने तख्तियां उठाईं, जिसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि इन सदस्यों को पता था कि प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए वे मुद्रित सामग्री सदन में लाए थे।
शमसीर ने कहा, ‘‘वे नहीं चाहते कि इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा हो।’’
इसके बाद विपक्षी विधायक सदन में आसन के पास पहुंच गए और दोषी कैदियों को पैरोल दिए जाने के विरोध में बैनर लहराते हुए नारे लगाने लगे। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के बावजूद सदन की कार्यवाही जारी रही।
भाषा
गोला सिम्मी
सिम्मी