मिजोरम के सैरांग रेलवे स्टेशन पर चार महीनों में 22 हजार से अधिक आईएलपी जारी: अधिकारी

मिजोरम के सैरांग रेलवे स्टेशन पर चार महीनों में 22 हजार से अधिक आईएलपी जारी: अधिकारी

मिजोरम के सैरांग रेलवे स्टेशन पर चार महीनों में 22 हजार से अधिक आईएलपी जारी: अधिकारी
Modified Date: January 9, 2026 / 10:54 am IST
Published Date: January 9, 2026 10:54 am IST

आइजोल, नौ जनवरी (भाषा) मिजोरम के सैरांग रेलवे स्टेशन पर पिछले वर्ष सितंबर में बैराबी-सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन के बाद से अब तक आगंतुकों को 22 हजार से अधिक ‘इनर लाइन परमिट’ (आईएलपी) जारी किए गए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी।

आईएलपी भारतीय नागरिकों को मिजोरम समेत संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश के लिए जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है। यह बंगाल ‘ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन’ (बीईएफआर), 1873 के प्रावधानों के तहत आता है, जिसे 1875 में ब्रिटिश सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया था।

सैरांग स्टेशन स्थित आईएलपी काउंटर पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 13 सितंबर 2025 से पिछले वर्ष के अंत तक कुल 20,914 आईएलपी जारी किए गए। यह अवधि बैराबी-सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन के बाद की है।

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उन्होंने बताया कि एक जनवरी से आठ जनवरी के बीच 1,517 अतिरिक्त आईएलपी जारी किए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 22,431 हो गई।

अधिकारी ने कहा, “हर बार ट्रेन के आगमन पर औसतन 100 से 200 आईएलपी जारी किए जाते हैं। आमतौर पर प्रतिदिन दो रेलगाड़ियां स्टेशन पर आती हैं।”

उन्होंने बताया कि अक्टूबर और नवंबर में आने वाले आगंतुकों में अधिकतर पर्यटक थे, जबकि दिसंबर में प्रवासी मजदूरों और व्यापारियों की संख्या अधिक रही।

अधिकारी के अनुसार, कुछ मौकों पर नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों का भी पता चला, जो स्टेशन से भागने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा, भिखारियों की पहचान कर उन्हें तुरंत उनके मूल गांवों में वापस भेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि आगंतुक विभिन्न राज्यों-दिल्ली, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी राज्यों-से आते हैं, हालांकि सबसे अधिक संख्या पड़ोसी राज्य असम से आने वालों की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन किया था। इसके साथ ही उन्होंने मिजोरम की पहली राजधानी एक्सप्रेस तथा आइजोल-कोलकाता और आइजोल-गुवाहाटी के बीच दो अन्य रेलगाड़ियों को भी हरी झंडी दिखाई थी।

भाषा मनीषा देवेंद्र

देवेंद्र


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