चार वर्षों में 61,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दीं: भगवंत मान

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चार वर्षों में 61,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दीं: भगवंत मान

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  • Publish Date - January 3, 2026 / 08:17 PM IST,
    Updated On - January 3, 2026 / 08:17 PM IST

चंडीगढ़, तीन जनवरी (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को कहा कि चार वर्षों में युवाओं को 61,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान करना सार्वजनिक भर्ती में योग्यता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के प्रति उनकी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मान ने चंडीगढ़ में आयोजित एक समारोह में शिक्षा विभाग में नवनियुक्त 606 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें 385 विशेष शिक्षा शिक्षक, 157 प्राथमिक शिक्षक, आठ प्रधानाचार्य और मानवीय आधार पर भर्ती किए गए 56 कर्मचारी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अप्रैल 2022 में सत्ता संभालने के बाद हमारी सरकार ने एक व्यापक भर्ती अभियान शुरू किया, जिसके तहत अब तक 61,281 सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं।”

उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि हर नियुक्ति पूरी तरह से योग्यता के आधार पर पारदर्शी तरीके से की गई और एक भी नियुक्ति को अदालत में चुनौती नहीं दी गई।”

मान ने कहा कि पहले युवाओं को नियुक्ति पत्र के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार करना पड़ता था, वे बेसब्री से अखबारों और डाकपेटियों को देखते रहते थे।

उन्होंने कहा, “वो दिन बीत चुके हैं। आज पंजाब सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था लागू की है, जहां योग्य युवाओं को उनकी क्षमता के आधार पर ही नौकरियां मिलती हैं।”

पूर्ववर्ती सरकारों पर स्पष्ट रूप से कटाक्ष करते हुए मान ने कहा कि पिछली सरकारें योग्यता और क्षमता का सम्मान करने में विफल रहीं तथा उन्होंने सरकारी नौकरियां अपने बेटों, भतीजों और चहेतों के बीच बांट दीं।

उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों ने योग्य युवाओं के दर्द को कभी महसूस ही नहीं किया, जो रोजगार की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर थे। महज चार वर्षों में हमने यह सुनिश्चित किया है कि पंजाब के हर गांव, कस्बे और शहर के युवाओं को योग्यता के आधार पर ही रोजगार मिले।”

मान ने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने आम परिवारों के युवाओं के लिए अवसरों के दरवाजे खोले हैं।

उन्होंने कहा, “आज मेहनती युवाओं को आगे बढ़ने का उचित मौका मिल रहा है। पारंपरिक राजनीतिक दल अपने परिवार को ही पंजाब मानते थे, लेकिन मेरे लिए पूरा पंजाब ही मेरा परिवार है।”

भाषा पारुल रंजन

रंजन