मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल ओजेम्पिक दवाएं भी हो सकती हैं बाल झड़ने का कारण : अध्ययन

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मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल ओजेम्पिक दवाएं भी हो सकती हैं बाल झड़ने का कारण : अध्ययन

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 05:42 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 05:42 PM IST

नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल ओजेम्पिक दवाएं विशेष तौर पर सेमाग्लूटाइड और टिरज़ेपैटाइड के दुष्प्रभाव से भी बाल झड़ने की समस्या हो सकती है। यह खुलासा एक नवीनतम अध्ययन में हुआ है।

‘द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधानपत्र के मुताबिक एसजीएलटी-2 इनहिबिटर (मधुमेह की दवाएं जो गुर्दे पर असर करती है और पेशाब के रास्ते अतिरिक्त शर्करा को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है) लेने वालों की तुलना में जीएलपी-1आरए लेने वालों में एलोपेशिया (बाल झड़ने की समस्या) होने की आशंका 37 प्रतिशत अधिक होती है जबकि डीपीपी-4 इनहिबिटर नामक दवा लेने वालों की तुलना में उनमें यह आशंका 68 प्रतिशत ज़्यादा थी।

डीपीपी-4 इनहिबिटर्स दवाओं का एक और वर्ग है जो डीपीपी-4 एंजाइम को रोकता है और इंसुलिन के स्राव को बढ़ावा देता है। इन सभी दवाओं का इस्तेमाल मधुमेह के इलाज में किया जाता है।

अमेरिका स्थित पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि भले ही इसका वास्तविक जोखिम कम हो, लेकिन इसके संभावित असर के बारे में जानकारी होने से इलाज से जुड़े फैसलों को लेने में मदद मिल सकती है।

अनुसंधान पत्र के लेखकों ने लिखा, ‘‘टाइप-2 मधुमेह के वयस्क मरीजों को जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट के इस्तेमाल से ‘नॉन-स्कारिंग एलोपेशिया’ (जिसमें बालों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं और बाल दोबारा उगने की संभावना बनी रहती है) का खतरा बढ़ जाता है।’’

उन्होंने कहा कि तेजी से वजन कम होने से बाल झड़ने की समस्या हो सकती है और इससे शरीर में आयरन या जिंक की कमी भी हो सकती है, जिससे बालों के बढ़ने का चक्र बाधित होता है। साथ ही, हार्मोन में बदलाव भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

अनुसंधान टीम ने हालांकि कहा कि इसकी पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए और अध्ययन की जरूरत है।

अध्ययन के नतीजों पर पहुंचने के लिए पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय ने उसके स्वास्थ्य संस्थान सेवा (पेन मेडिसिन) के मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें टाइप-2 मधुमेह वाले उन वयस्कों में एलोपेशिया (बाल झड़ने) की दर की तुलना की गई, जिन्होंने जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट या मधुमेह की अन्य दवाएं (जैसे एसजीएलटी-2 इनहिबिटर और डीपीपी-4 इनहिबिटर) लेना शुरू किया था।

अनुसंधानपत्र के मुताबिक जनवरी 2019 और सितंबर 2024 के बीच,जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट का इस्तेमाल करने वाले 12,004 मरीज़ों की तुलना एसजीएलटी-2 इनहिबिटर का इस्तेमाल करने वाले 15,221 मरीजों से की गई, और जीएलपी-1 का इस्तेमाल करने वाले 11,964 मरीज़ों की तुलना डाइपेप्टिडाइल पेप्टिडेज़ (डीपीपी)-4 दवाओं का इस्तेमाल करने वाले 11,233 मरीज़ों से की गई।

भाषा धीरज नरेश

नरेश