स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के तहत एमएसपी नहीं मिलने से धान किसानों को भारी नुकसानः एसकेएम

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के तहत एमएसपी नहीं मिलने से धान किसानों को भारी नुकसानः एसकेएम

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के तहत एमएसपी नहीं मिलने से धान किसानों को भारी नुकसानः एसकेएम
Modified Date: August 6, 2026 / 07:43 pm IST
Published Date: August 6, 2026 7:43 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बृहस्पतिवार को कहा कि एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू न होने के कारण देश में औसतन पांच एकड़ वाले धान किसान को हर फसल चक्र (सीजन) में लगभग 1.50 लाख रुपये का नुकसान होता है।

एसकेएम ने एक बयान जारी कर धान किसानों से 10 अगस्त को आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का आह्वान किया। किसान संगठन ने याद दिलाया कि स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार एमएसपी देना 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनावी वादों में शामिल था।

एसकेएम ने दावा किया कि वर्ष 2026-27 में स्वामीनाथन आयोग का एमएसपी फार्मूला लागू न होने के कारण धान किसानों को कुल मिलाकर लगभग 3.07 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

वर्ष 2020-21 में दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले किसान संगठनों के शीर्ष निकाय ने कहा, ‘एसकेएम पूरे भारत के धान किसानों से (नरेन्द्र) मोदी नीत राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार के तहत कॉरपोरेट ताकतों और उनके बिचौलियों द्वारा की जा रही एमएसपी लूट के खिलाफ 10 अगस्त के बड़े विरोध प्रदर्शनों – ‘जेल भरो’, ‘रेल रोको’, ‘रास्ता रोको’ में शामिल होने का आह्वान करता है।’

एसकेएम ने कहा कि भाजपा ने अपने 2014 के चुनाव घोषणापत्र में एम एस स्वामीनाथन दर से एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन पिछले 12 वर्षों के दौरान उसने किसानों से वादाखिलाफी की है।

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में