पद्मश्री से सम्मानित तेलंगाना के ‘वनजीवी’ रामैया का निधन

पद्मश्री से सम्मानित तेलंगाना के ‘वनजीवी’ रामैया का निधन

पद्मश्री से सम्मानित तेलंगाना के ‘वनजीवी’ रामैया का निधन
Modified Date: April 12, 2025 / 05:18 pm IST
Published Date: April 12, 2025 5:18 pm IST

हैदराबाद, 12 अप्रैल (भाषा) पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित ‘वनजीवी’ रामैया का शनिवार को तेलंगाना के खम्मम जिले में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे।

रामैया के परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रेड्डीपल्ली गांव में अपने पैतृक घर में उन्हें दिल का दौरा पड़ा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और कई अन्य नेताओं ने रामैया के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं कर पाने के बावजूद पेशे से कुम्हार रामैया को पौधरोपण के उनके अथक मिशन को लेकर ‘वृक्ष पुरुष’ के रूप में जाना जाता था।

हरियाली में विस्तार के प्रति उनका समर्पण इतना अधिक था कि जब भी वह घर से बाहर निकलते थे तो अपने गले में एक बोर्ड लटका कर रखते थे, जिस पर लिखा होता था ‘वृक्षो रक्षति रक्षितः’ (वृक्षों को बचाओ, तो वृक्ष तुम्हें बचाएंगे)।

केवल रामैया ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी जनम्मा ने भी उनके (अपने पति के) जीवन मिशन का अनुसरण किया।

अपनी गरीबी की परवाह किए बिना, रामैया ने पांच दशकों से अधिक समय तक इस मिशन को चलाया और अनुमान है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए।

दरिपल्ली रामैया को खम्मम जिले में हरित योद्धा, ‘चेट्टू (वृक्ष) रामैया’ या ‘वनजीवी’ नाम से भी जाना जाता था। पर्यावरण के प्रति उनके इस योगदान के लिए उन्हें 2017 में पद्म श्री पुरस्कार दिया गया था।

दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रामैया का जीवन लाखों पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा के लिए समर्पित था।

मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “दरिपल्ली रामैया गारू को संपोषणीयता के हिमायती के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपना जीवन लाखों पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों में प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम और भावी पीढ़ियों के प्रति चिंता झलकती है। उनका काम हमारे युवाओं को हरित ग्रह बनाने के उनके प्रयास के कारण प्रेरित करता रहेगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ”

मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने रामैया के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनका निधन समाज के लिए एक ‘अपूरणीय क्षति’ है।

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान के मुताबिक, रेवंत रेड्डी ने कहा, ‘‘रामैया ने अकेले वृक्षारोपण की शुरुआत की और पूरे समाज को प्रभावित किया।’’ उन्होंने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार सम्मानित रामैया ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करके युवाओं को प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि एक करोड़ पौधे लगाने में रामैया का योगदान प्रेरणा का स्रोत है और हरित योद्धा का निधन पर्यावरण संरक्षण आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव और कई अन्य नेताओं ने रामैया के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

अपने संदेश में किशन रेड्डी ने कहा कि रामैया ने अपने जीवनकाल में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए और प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा तथा संवर्धन में वह अग्रणी रहे।

दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संजय कुमार ने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित हरित योद्धा का निधन तेलंगाना और प्रकृति के लिए क्षति है।

केसीआर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के मामले में रामैया का जीवन भावी पीढ़ियों के लिए आदर्श है।

भाषा प्रशांत राजकुमार

राजकुमार


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