नृशंस हमले के एक साल बाद आतंक की साया से उबरा पहलगाम

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नृशंस हमले के एक साल बाद आतंक की साया से उबरा पहलगाम

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 06:56 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 06:56 PM IST

(जेहरा शफी)

श्रीनगर, 17 अप्रैल (भाषा) पिछले साल 22 अप्रैल को दुनिया उस समय स्तब्ध रह गई थी जब जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के सुरम्य बैसरन घास के मैदान पर एक जघन्य आतंकवादी हमला हुआ था और 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के क्रूर हमले के बाद कश्मीर से पर्यटक दूर होने लगे। प्रशासन ने जम्मू और कश्मीर में लगभग 50 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया। बाद में, सुरक्षा ऑडिट के बाद उनमें से कुछ को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोला गया।

अब, लगभग एक साल बाद पहलगाम का यह सुरम्य मैदान एक बार फिर पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार हैं। अनंतनाग जिले में इस ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ की यात्रा करने के अपने फैसले पर किसी को पछतावा नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र पिछले साल के आतंकी हमले की छाया से उबर रहा है।

छत्तीसगढ़ के आशुतोष कोसारिया ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इतनी ऊंचाई पर इतने विशाल मैदान होंगे। हम मनाली, गंगटोक और पूर्वोत्तर जा चुके हैं, लेकिन यहां इतने खुले मैदानों की उम्मीद नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था बहुत बढ़िया है।”

कुछ समय पहले तक वाम चरमपंथ से त्रस्त रहे राज्य से आने वाले कोसारिया पहलगाम में सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी को अच्छी तरह समझते हैं।

उन्होंने कहा, “हम छत्तीसगढ़ से हैं। हमने बस्तर में सेना देखी है। यहां भी वही हाल है। हमें कोई परेशानी नहीं हुई।”

पिछले साल हुए आतंकी हमले ने कोसारिया परिवार को हतोत्साहित नहीं किया।

कोसारिया ने कहा, “यहां इतने सारे लोग रहते हैं। ऊपर स्थित मंदिर से पूरा शहर दिखाई देता है। यह विश्वास करना मुश्किल है कि यहां ऐसी घटनाएं (आतंकी हमले) हो सकती हैं।”

उन्होंने पहलगाम घूमने के इच्छुक लोगों को सलाह भी दी।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह भारत का वह हिस्सा है जिसे हर किसी को देखना चाहिए। यह बहुत सुंदर है। यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस क्षेत्र को घूमने के लिए कम से कम 10-15 दिन का समय निकालें।”

कोलकाता की तनुश्री दत्ता ने कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की।

उन्होंने कहा, “सुरक्षा व्यवस्था बेहतरीन है। हमने गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम का दौरा किया। पिछले साल हुए आतंकी हमले से हम बिल्कुल भी नहीं डरे। महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अभी यहां हैं और यह जगह सुरक्षित है।”

उन्होंने कहा, “हो सकता है कि तब जोखिम रहा हो, लेकिन अब नहीं। सेना और पुलिस हर जगह मौजूद हैं – उन्होंने हमारी बहुत मदद की। हमने गुलमर्ग में बर्फबारी भी देखी, और उन अनुभवों को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। चिंता की कोई बात नहीं है।”

हरियाणा के पानीपत से प्रदीप मलिक ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की।

मलिक ने कहा, “हर जगह सुरक्षा कड़ी है। व्यवस्था बहुत अच्छी है। ऐसा लगता है कि पिछले साल के आतंकी हमले का कोई असर नहीं हुआ है। बल्कि, अब सुरक्षा और भी कड़ी हो गई है। मुझे लगता है कि हर किसी को एक बार कश्मीर जरूर जाना चाहिए। ऐसा लगता ही नहीं कि हम अपने ही देश में हैं।”

राजस्थान के अमान इमरान ने कहा कि पहलगाम की घटना का घाटी घूमने के उनके फैसले पर कोई खास असर नहीं पड़ा।

इमरान ने कहा, “यह जगह अपने आप में बेहद खूबसूरत है। सुरक्षा व्यवस्था बेहतरीन है।”

सुरक्षा स्थिति बेहतर होने, कई पर्यटक स्थलों के खुल जाने के बाद पर्यटक अब घाटी में लौटने लगे हैं।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश