(वर्षा सागी )
नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की पालम कालोनी स्थित एक मकान में बुधवार को लगी भीषण आग में एक ही परिवार के नौ लोगों की जान एक दूसरे को बचाने की कोशिश में गई।
राम चौक मार्केट के पास, पालम मेट्रो स्टेशन के समीप स्थित एक बहुमंजिला इमारत में आग से भीषण तबाही मच गई। घटना में तीन बच्चों सहित नौ लोग मारे गए और तीन घायल हुए। इमारत की निचली और पहली मंजिल पर कपड़े तथा कॉस्मेटिक का शोरूम था और इमारत के मालिक राजेंद्र कश्यप और उनका परिवार ऊपरी मंजिलों पर रहता था। राजेंद्र कश्यप स्थानीय मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।
पुलिस के अनुसार, इस अग्निकांड में राजेंद्र की पत्नी लाडो (70), उनके बेटे प्रवेश (33) और कमल (39), कमल की पत्नी आशु (35) और उनकी तीन बेटियां (15, छह और तीन वर्ष), लाडो की बेटी हिमांशी (22) और बहू दीपिका (28) की जान चली गई।
कई परिवारजन उस समय घर पर मौजूद नहीं थे। राजेंद्र गोवा में थे। उनके बेटे सुनील और उसकी पत्नी गौरी छुट्टियां मनाने के लिए गए हैं। एक अन्य बेटे प्रवेश ने हादसे से कुछ ही देर पहले अपनी पत्नी और बेटे को उसके मायके पहुंचाया था। बड़ा बेटा कमल बाली में एक सम्मेलन से हाल ही में लौटा था। हादसे में कमल की जान चली गई।
शोरूम की कर्मचारी रिया ने कहा, “मैंने इस परिवार को वर्षों तक करीब से देखा है। वे कभी खुद को पहले बचाने के बारे में नहीं सोचते। उस समय वे बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों को बचाने की कोशिश में थे।”
एक अन्य सहकर्मी ने कहा कि परिवार एक इकाई की तरह चलता था और आग तथा धुएँ के बीच वे एक-दूसरे की मदद करने में जुटे रहे।
घटना के समय, राजेंद्र के बेटे अनिल (32) ने अपनी डेढ़ साल की बेटी को तीसरी मंजिल से दूसरी मंजिल पर उतारने की कोशिश की, जहां सीढ़ी रखी गई थी। बच्ची गिर गई और उसे बचाने के लिए अनिल भी कूद गए। दोनों घायल हैं और उपचाराधीन हैं। सचिन (29) परिवार का एक अन्य सदस्य है। वह पास की इमारत पर कूदकर जान बचाने की कोशिश में 25 प्रतिशत जल गया। वह अब अस्पताल में हैं।
पुलिस को आग की सूचना सुबह करीब सात बजे मिली। मौके पर करीब 30 दमकल वाहन और 11 एम्बुलेंस भेजे गए। साथ ही पुलिस, बीएसईएस, वायुसेना पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें तैनात की गईं।
परिवार के मित्र राजेंद्र कश्यप बजाज ने कहा, “यह केवल कुछ जानों का नुकसान नहीं है, बल्कि पूरे परिवार का जीवन एक ही रात में समाप्त हो गया। जो यहां खड़ा था, वह सिर्फ घर नहीं, वर्षों से बना एक पूरा परिवार था, और आज वह सब तहस-नहस हो गया।”
भाषा
मनीषा सुरेश
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