Jal Ganga Samvardhan Abhiyan: गंगा दशहरा तक प्रदेशभर में चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान, सीएम मोहन यादव ने किया शुभारंभ, लोगों को दिलवाई गई ये शपथ

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गंगा दशहरा तक प्रदेशभर में चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान, Jal Ganga Samvardhan Abhiyan in MP, Read Full News

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 06:29 PM IST

भोपाल/इंदौर। Jal Ganga Samvardhan Abhiyan: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज नव संवत्सर एवं गुड़ी पड़वा के अवसर पर इस्कॉन मंदिर, इंदौर के परिसर स्थित तालाब में गंगा जल अर्पित कर “जल गंगा संवर्धन अभियान” (तृतीय चरण) का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रार्थना की और गौ-पूजन किया। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गुड़ी पड़वा पर प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान के अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता से जल एवं जल स्रोतों के संरक्षण के लिए कार्य किए जाएंगे। अभियान का समापन 30 जून 2026 को होगा।

जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण

Jal Ganga Samvardhan Abhiyan: अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार ने पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन और मौजूदा तीसरे वर्ष में गुढ़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 139 दिनों तक प्रदेशभर में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। गुढ़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड, चैत्र नवरात्रि सभी त्योहारों की बधाई देता हूं। इस अवसर पर प्रदेश में तीसरी बार जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ हुआ है। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्यप्रदेश के साथ-साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। हमारे नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ोसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल संचय के अभियान में देशभर के जल स्त्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है। यह प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा वर्ष है। प्रदेशभर में 3 महीने तक 2500 करोड़ की प्रस्तावित राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे।

इंदौर को दी अनेकों विकास कार्यों की सौगात

इंदौर वासियों को विकास कार्यों की सौगात देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत सिंगल क्लिक के माध्यम से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों का भूमि-पूजन सहित कुल 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में जल की बर्बादी रोकने और एक-एक बूंद बचाने के लिए शपथ दिलवाई। ‘जल ही जीवन है, जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह है, जो पृथ्वी माता को जीवन देती हैं। ब्रह्मांड में जल के महत्व से हम सभी परिचित हैं। अगर जीवन को सफल करना है तो प्राचीन समय के कुएं, नदियां, तालाब, बाबड़ी का जीर्णोद्धार करना है, जिनका सम्राट विक्रमादित्य, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर, महाराज सिंधिया ने निर्माण कराया था। इंदौर में 21 बाबड़ियों का जीर्णोद्धार कराया गया है।

पराक्रम, पुरुषार्थ, और उत्सव की है हमारी संस्कृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति है। आज विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हो रहा है। आज का दिन सम्राट विक्रमादित्य का स्मरण करने वाला है। विक्रमादित्य ने अपनी वीरता, गंभीरता, दानशीलता और लोकप्रियता के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। प्रकृति में ऋतुओं का राजा बसंत है और भारतीय नववर्ष के मौके पर चारों ओर बसंत की आकर्षक छटा दिखाई देती है। सनातन संस्कृति में मौसम, ऋतुओं और मंगल तिथियों के आधार पर पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं। इन तिथियों पर मंगल कार्य संपन्न किए जाते हैं।

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