नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कनॉट प्लेस स्थित एक होटल में 2020 में लगी आग की घटना में लापरवाही के आरोपों से होटल के दो कर्मचारियों को बरी कर दिया है जिसमें होटल के मेहमान घायल हुए थे।
अदालत ने दोनों कर्मचारियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ किसी विशिष्ट लापरवाही वाले कृत्य को साबित करने में विफल रहा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट चरण सलवान मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पार्क होटल के कार्यकारी स्तर के कर्मचारी बासुदेव सिंह डडवाल और रोहित अरोड़ा आरोपी थे। उनके खिलाफ कनॉट प्लेस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 285 (आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाही वाला आचरण) और धारा 337 (लापरवाही वाले या उतावले कृत्य से चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों आरोपियों ने होटल में दूरसंचार और बिजली के तार रखे थे, जिन्हें ज्वलनशील सामग्री बताया गया था और मानव जीवन के लिए खतरे को देखते हुए पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई।
अभियोजन ने दावा किया था कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण 15 फरवरी, 2020 को होटल में आग लगने की घटना के दौरान पांच मेहमानों को मामूली चोटें आईं, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
सोलह सितंबर को पारित आदेश में अदालत ने कहा कि केवल आग लगने की घटना होना आईपीसी की धारा 285 लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उसने कहा कि अभियोजन को यह साबित करना होगा कि कौन-सा विशेष कृत्य या चूक लापरवाही के दायरे में आती है और ज्वलनशील सामग्री को किस तरह रखा, संभाला या सुरक्षित रखा गया, जिससे खतरा पैदा हुआ।
अदालत ने कहा कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि दोनों में से किसी आरोपी ने व्यक्तिगत रूप से उस तरीके से सामग्री रखी या अपने कब्जे में रखी, जैसा कि संबंधित धारा के तहत अपराध के लिए आवश्यक है।
डडवाल के निदेशक (इंजीनियरिंग) होने के नाते सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होने के आरोप पर अदालत ने कहा, ‘‘केवल पद या प्रशासनिक जिम्मेदारी से अपने आप किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध स्थापित नहीं हो सकता।’’
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने नियुक्ति पत्र, सेवा समझौता, जिम्मेदारी सौंपने संबंधी लिखित दस्तावेज या कोई अन्य रिकॉर्ड पेश नहीं किया, जिससे कथित खराब बिजली वायरिंग के संबंध में दोनों आरोपियों के सटीक कर्तव्यों का पता चलता हो।
अदालत ने कहा, ‘‘विशेष रूप से, विद्युत निरीक्षक की गवाही कथित दोषपूर्ण विद्युत स्थापना के अभियोजन के सिद्धांत का समर्थन नहीं करती… जांच अधिकारी (आईओ) ने भी माना कि रिपोर्ट में आग लगने का सटीक कारण पता नहीं चलने की बात दर्ज थी।’’
होटल के एक मेहमान के घायल होने के संबंध में अदालत ने कहा कि ‘‘चोट साबित होना आपराधिक लापरवाही साबित होने के समान नहीं है’’।
अदालत ने कहा कि घायल मेहमान ने आरोपियों को कोई लापरवाही वाला कृत्य करते नहीं देखा था और उसने केवल यह राय व्यक्त की थी कि आग होटल के कर्मचारियों या अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगी।
अदालत ने कहा कि आरोपियों से संबंधित विशिष्ट लापरवाही वाला कृत्य साबित करने वाले साक्ष्य के अभाव में ऐसी राय अपने आप आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।
अदालत ने कहा, ‘अभियोजन पक्ष आरोपियों की कथित लापरवाही और शिकायतकर्ता (होटल मेहमान) को हुई चोटों के बीच आवश्यक संबंध स्थापित करने में विफल रहा है।’
अदालत ने यह भी कहा कि जांच सही तरीके से नहीं की गई।
अदालत ने जांच में कई खामियां गिनाईं, जिनमें कथित ज्वलनशील तारों को जब्त नहीं करना, जिन तस्वीरों पर भरोसा किया गया उनमें तारीख या समय का उल्लेख नहीं होना, अभियोजन द्वारा पद के आधार पर जिम्मेदारी तय करने के बावजूद डडवाल का नियुक्ति पत्र हासिल नहीं करना, होटल कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ नहीं करना तथा निरीक्षक की रिपोर्ट में आग लगने का कारण निर्धारित नहीं किया जाना शामिल था।
मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘मेरे सुविचारित मत में, इन परिस्थितियों को समग्र रूप से देखने पर अभियोजन के इस सिद्धांत पर गंभीर और उचित संदेह पैदा होता है कि आग और उससे हुई चोटें आरोपियों के किसी विशिष्ट लापरवाही वाले कृत्य या चूक का परिणाम थीं।’
उन्होंने कहा कि किसी प्रतिष्ठान में आरोपी का प्रबंधकीय या पर्यवेक्षी पद पर होना मात्र आपराधिक जिम्मेदारी तय करने का आधार नहीं हो सकता।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि अभियोजन को उस व्यक्ति के विशेष कृत्य या चूक को साबित करना होगा और यह भी दिखाना होगा कि उस कृत्य या चूक तथा उसके परिणाम के बीच आवश्यक कारण संबंध है।
उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि दोनों आरोपियों में से किसी ने कोई उतावला या लापरवाही वाला कृत्य किया या होटल मेहमानों को लगी चोटें विशेष रूप से उनके किसी ऐसे कृत्य के कारण हुईं।
अदालत ने इसके बाद दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश