एमएसएमई के निशुल्क पंजीकरण के लिए डिजिटल मंच के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

एमएसएमई के निशुल्क पंजीकरण के लिए डिजिटल मंच के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

एमएसएमई के निशुल्क पंजीकरण के लिए डिजिटल मंच के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी
Modified Date: August 7, 2026 / 12:56 pm IST
Published Date: August 7, 2026 12:56 pm IST

( तस्वीर सहित )

नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) संसद ने शु्क्रवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने वाले एक विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें एमएसएमई के नि:शुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिसूचित करने का प्रावधान है।

लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के बीच ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026’ को चर्चा के बिना पारित कर दिया।

इससे पहले राज्यसभा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने वाला यह विधेयक सोमवार को पारित हो चुका है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण एक बार स्थगित होने के बाद लोकसभा की बैठक दो बजे शुरू हुई तो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने इस विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए सदन में रखा।

इस दौरान भी सदन में विपक्ष के सांसदों का हंगामा जारी रहा। हंगामे के बीच ही लोकसभा ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों में कहा गया है कि एमएसएमई आर्थिक विकास के मुख्य कारक हैं, रोजगार सृजन करते हैं और नवाचार को बढ़ावा देते हैं। ऐसी इकाइयां सकल घरेलू उत्पाद एवं निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं तथा देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

इसमें कहा गया कि पिछले कुछ समय के दौरान तकनीकी बदलाव, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित प्रणालियों के बढ़ते प्रयोग और बदलते विधिक परिदृश्य के कारण मूल अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता महसूस की गयी। इस विधेयक के माध्यम से 2006 के मूल अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।

विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि एमएसएमई के नि:शुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म अधिसूचित किया गया जाएगा।

इसमें कहा गया है कि एमएसएमई की तरलता के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए इन इकाइयों से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के मामले में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को उनके ‘‘इनवॉइस’’ का निस्तारण व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली प्लेटफार्म के माध्यम से करना होगा।

विधेयक में इस बात के भी प्रावधान हैं कि राज्य अपने सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी इस तरह के उपबंध करेंगे।

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा


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