नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) संसद ने मंगलवार को विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन के लिए एक आयोग गठित करने के प्रावधान वाले विधेयक को मंजूरी दे दी।
उच्च सदन ने ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ पर हुई चर्चा का विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा जवाब दिए जाने के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा पेश संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित चुकी है।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए सदन से वॉक आउट किया।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में चल रही ‘सुधार एक्सप्रेस’ का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक न्यायाधिकरणों के अधिकार क्षेत्र बदलने का विधेयक नहीं है, बल्कि इसका प्रमुख उद्देश्य विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के लिए दक्षता बढ़ाना, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और पात्रता संबंधी मानदंडों में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए सदस्यों ने कहा कि देश में न्यायाधिकरण व्यवस्था को मजबूत करने से देश की अदालतों में लंबित बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। कुछ सदस्यों ने कहा कि राष्ट्रीय आयोग के गठन से न्यायाधिकरणों के गठन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालयों एवं उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति में अनुसूचित जाति एवं जनजाति से आने वाले न्यायाधीशों की बहुत कम नियुक्ति की जा रही है।
इस पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम करता है और इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका केवल कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी देना भर है।
उन्होंने कहा कि वह देश के पहले ऐसे आदिवासी हैं जो कानून मंत्री बने तथा डा. बी आर आंबेडकर के बाद कानून मंत्री बनने वाले दूसरे बौद्ध हैं।
इस विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित आयोग का मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी में होगा और इसमें एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य होंगे। इनमें दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य होंगे।
उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश इस प्रस्तावित आयोग के अध्यक्ष पद के लिए पात्र होंगे।
विधेयक के मसौदे के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने हाल में ‘न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021’ के कुछ प्रावधानों को इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि वे शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत हैं।
उच्चतम न्यायालय ने एक ऐसे राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का भी निर्देश दिया था जो स्वतंत्र हो, जिसमें पेशेवर विशेषज्ञता हो तथा विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन एवं नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था अपनाई जाए।
इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद 2021 का अधिनियम निरस्त हो जाएगा।
भाषा माधव अविनाश
अविनाश