नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को एक संसदीय समिति को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और बेहतर ढंग से समझने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसदीय समिति के सदस्यों को ‘सांस्कृतिक व्याख्या और विरासत संरक्षण के लिए एआई के एकीकरण’ के बारे में जानकारी दी।
बाद में समिति के सदस्यों ने युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय स्थल का दौरा किया और वहां निर्माण एवं विकास कार्यों का निरीक्षण किया।
समिति के अध्यक्ष और जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा ने बताया कि बैठक में अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और बेहतर ढंग से समझने के लिए एआई के इस्तेमाल, और साथ ही ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत जारी कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत की सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया गया एवं इसे नयी पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।’’
झा ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत हाल में हुए व्यापक सर्वेक्षण में बिहार ने देश में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए गर्व की बात है।’’
उन्होंने कहा कि राज्य में आठ लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों का सत्यापन किया जा चुका है, जिनमें सबसे अधिक पांडुलिपियां मधुबनी जिले में पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि यह मिथिला की समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
झा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि मिथिला सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में संरक्षित अमूल्य पांडुलिपियों का संरक्षण, डिजिटलीकरण और अध्ययन न केवल हमारी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नयी पहचान देगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक अमूल्य स्रोत भी सिद्ध होगा।’’
भाषा आशीष प्रशांत
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