संसदीय समिति का एआई और उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष हिंदी शब्दावली विकसित करने का सुझाव

संसदीय समिति का एआई और उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष हिंदी शब्दावली विकसित करने का सुझाव

संसदीय समिति का एआई और उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष हिंदी शब्दावली विकसित करने का सुझाव
Modified Date: March 18, 2026 / 01:06 pm IST
Published Date: March 18, 2026 1:06 pm IST

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए हिंदी में डोमेन-विशिष्ट शब्दकोश विकसित करने की सिफारिश की, ताकि तकनीकी और प्रशासनिक संचार में भाषा की ‘‘व्यावहारिक उपयोगिता मजबूत’’ हो।

संसद के दोनों सदनों में मंगलवार को पेश रिपोर्ट में, गृह मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने 2026–27 के लिए आधिकारिक भाषा विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की सराहना की।

रिपोर्ट में कहा गया कि 20,000 पत्र और 40,000 पृष्ठों का अनुवाद, 25,000 कर्मियों को हिंदी प्रशिक्षण, केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा 1,175 अधिकारियों को प्रशिक्षण, हिंदी शब्दसिंधु संग्रह का 7.5 लाख शब्दों तक विस्तार, 15 भारतीय भाषाओं में ‘मेडिकल शब्दसिंधु’ शब्दकोश की तैयारी, और लगभग 852 कार्यालयों/बैंकों/उपक्रमों का क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालयों द्वारा निरीक्षण… इन सभी पहलों के लिए समिति ने प्रशंसा की।

रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘समिति उस परिणाम-केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना करती है जो मापनीय भौतिक लक्ष्यों के निर्धारण में परिलक्षित हुआ है। समिति प्रस्तावित लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा करती है।’’

इसके अलावा, समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया कि वह विशेष क्षेत्रों की शब्दावली के विस्तार पर विचार करे, विशेष रूप से डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों में, ताकि तकनीकी तथा प्रशासनिक संचार में हिंदी का व्यावहारिक उपयोग और मजबूत हो।

रिपोर्ट में मंत्रालय की हाल की तकनीकी पहलों का भी जिक्र है, विशेष रूप से कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित अनुवाद प्लेटफॉर्म ‘‘भारती – बहुभाषी अनुवाद सारथी’’ का उन्नयन, इसे ई-ऑफिस के साथ एकीकृत करना, और केंद्र और राज्यों के बीच बहुभाषी पत्राचार को सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय भाषाएँ अनुभाग की स्थापना आदि।

रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘समिति का मानना है कि ये पहल प्रशंसनीय हैं, लेकिन मंत्रालय को अन्य मंत्रालयों और विभागों में अनुदित सामग्री की गुणवत्ता, समयबद्धता और वास्तविक उपयोग का मूल्यांकन करने के लिए एक ठोस प्रदर्शन-निगरानी ढांचा स्थापित करने पर विचार करना चाहिए।’’

भाषा मनीषा माधव

माधव


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