हरियाली के शीतलन प्रभाव के लिए नमी और वायु प्रवाह पर ध्यान देना भी अहम : अध्ययन
हरियाली के शीतलन प्रभाव के लिए नमी और वायु प्रवाह पर ध्यान देना भी अहम : अध्ययन
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने की योजना बनाते समय पेड़-पौधे लगाने के साथ-साथ नमी और वायु प्रवाह को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि शीतलन प्रभाव हासिल हो सके। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर की ओर से देश के 138 शहरों में किए गए हालिया विश्लेषण से यह बात सामने आई है।
विश्लेषण में पाया गया कि पेड़ों की छाया गर्मी के एहसास में कमी लाने का सबसे कारगर जरिया है, क्योंकि यह लोगों को धूप से बचाती है और सतहों को भी ज्यादा गर्म होने से रोकती है।
आईआईटी गांधीनगर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग से शोध स्नातक और मुख्य अध्ययनकर्ता अंगना बोरा ने कहा कि ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्ष शहरी क्षेत्रों में हरियाली के लिए अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हैं।
बोरा ने कहा, “सवाल यह नहीं है कि शहरों को हरा-भरा किया जाना चाहिए या नहीं। उन्हें बेशक किया जाना चाहिए। सवाल यह है कि किस तरह की हरियाली, कहां और कितनी मात्रा में।”
उन्होंने कहा, “शुष्क शहरों में पेड़-पौधे काफी हद तक ठंडक प्रदान कर सकते हैं। लेकिन आर्द्र और घनी आबादी वाले इलाकों में योजना निर्माताओं को वायु प्रवाह और नमी के संचय पर भी विचार करना चाहिए।”
अध्ययनकर्ताओं ने उष्णकटिबंधीय सवाना, अर्ध-शुष्क घास के सपाट मैदानों और आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में 2003-2020 के दौरान दर्ज किए गए तापमान और आर्द्रता के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
उन्होंने केवल सतह के तापमान पर निर्भर रहने के बजाय ‘हीट इंडेक्स’ का पुनर्निर्माण किया, जो तापमान और आर्द्रता के प्रभाव को जोड़ता है और यह अधिक स्पष्ट रूप से बताता है कि मानव शरीर को गर्मी कैसे महसूस होती है।
आईआईटी गांधीनगर में एसोसिएट प्रोफेसर उदित भाटिया ने कहा, “जलवायु अनुकूलन के लिए हरियाली जरूरी है और पेड़ों की छाया से लोगों को तुरंत राहत मिलती है।”
भाटिया ने कहा, “हमारे निष्कर्ष दिखाते हैं कि एक ही तरह की वृक्षारोपण रणनीति समस्या के एक हिस्से को अनदेखा कर देती है। शहरों को ऐसी हरियाली रणनीति अपनाने की जरूरत है, जो छाया, नमी और वायु प्रवाह तीनों को ध्यान में रखकर बनाई गई हो।”
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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