मुस्लिम कानून के तहत उपहारों पर याचिका: याचिकाकर्ताओं को विधि आयोग से संपर्क करने को कहा गया

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मुस्लिम कानून के तहत उपहारों पर याचिका: याचिकाकर्ताओं को विधि आयोग से संपर्क करने को कहा गया

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  • Publish Date - March 12, 2026 / 08:25 PM IST,
    Updated On - March 12, 2026 / 08:25 PM IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उन दो याचिकाकर्ताओं को विधि आयोग से संपर्क करने को कहा, जिन्होंने मुस्लिम कानून के तहत दिए गए उपहार को पंजीकरण से छूट संबंधी 1882 के कानून के एक प्रावधान को चुनौती दी है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के लिए उचित उपाय यह होगा कि वे विधि आयोग जैसे विशेषज्ञ निकाय से संपर्क करें, जिसे मौजूदा कानूनों में उपयुक्त संशोधन की सिफारिश करने या नए कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि याचिका में संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 129 और मुस्लिम पर्सनल लॉ अधिनियम, 1937 की धारा 2 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जहां तक ​​’उपहार’ शब्द का संबंध है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत दिए गए उपहारों को स्टांप शुल्क के भुगतान की आवश्यकता से छूट दी गई है, जबकि गैर-मुसलमानों को यह छूट नहीं दी गई है।

पीठ ने कहा कि यदि सरकारी खजाने को कोई नुकसान होता है, तो संसद ही सक्षम मंच होगा। पीठ ने कहा, ‘‘संसद कानून में संशोधन कर सकती है और नया कानून ला सकती है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने पूछा कि याचिकाकर्ताओं ने किसी भी सांसद के समक्ष यह बात क्यों नहीं उठाई कि कानून में कथित भेदभाव का कोई तत्व मौजूद है।

वकील ने कहा कि संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम और पंजीकरण अधिनियम के बीच परस्पर संबंध है।

उन्होंने कहा, ‘‘दान की अवधारणा के संबंध में पर्सनल लॉ और मौलिक अधिकारों के बीच टकराव का निपटारा इस न्यायालय द्वारा किया जाना है।’

पीठ ने कहा कि यह कानून 1882 का है।

न्यायालय ने कहा, ‘‘अचानक 2026 में आपको याद आया कि यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है और जब आपको यह याद आया, तो आपने उन लोगों को सूचित करना भी उचित नहीं समझा जो इसे सुधारने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ‘‘सर्वश्रेष्ठ मंच’’ विधि आयोग होगा।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं को विधि आयोग से संपर्क करने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निपटारा किया।

भाषा आशीष नरेश

नरेश