नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक याचिकाकर्ता को अपनी उस याचिका के साथ कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करने की अनुमति दे दी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाये गए थे, उन्हें राशन सूची से भी बाहर किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष यह मामला उठाया।
वकील ने पीठ से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, ताकि वह उच्च न्यायालय का रुख कर सकें। पीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने की छूट दे दी।
मंगलवार को जब इस मामले को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया गया, तो शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि एसआईआर में बाहर किये गए लोगों के नाम राशन सूची से हटाने की कोशिश की जा रही और कई लाभार्थियों के बाहर होने का खतरा है।
मंगलवार को पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ‘‘कृपया इसे उच्च न्यायालय में ले जाएं।’’
पश्चिम बंगाल के खाद्य और आपूर्ति विभाग ने चार जून को जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) में अयोग्य लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें इससे हटाने के लिए पूरे राज्य में सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। इस प्रक्रिया को एसआईआर के नतीजों से जोड़ा गया।
एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस प्रक्रिया में वे राशन कार्ड धारक शामिल होंगे जिनके नाम मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हटा दिए गए थे या जिन्हें अयोग्य पाया गया था। इस प्रक्रिया को 15 जून तक पूरा किया जाना था।
आदेश में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा एसआईआर प्रक्रिया पूरी किये जाने और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद, विभाग ने ‘‘उन पीडीएस लाभार्थियों के सत्यापन और उन्हें हटाने’’ का फैसला किया है जो अयोग्य पाये गए हैं।
हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों ने एसआईआर न्यायाधिकरण में अपील दायर की है या नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत आवेदन किए हैं, उनके नाम अपील या आवेदन के निस्तारण तक राशन कार्ड डेटाबेस में बने रहेंगे।
भाषा सुभाष माधव
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