‘भूल जाने के अधिकार’ संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर दो सितंबर को होगी सुनवाई

‘भूल जाने के अधिकार’ संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर दो सितंबर को होगी सुनवाई

‘भूल जाने के अधिकार’ संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर दो सितंबर को होगी सुनवाई
Modified Date: August 19, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: August 19, 2026 3:56 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कानूनी डेटाबेस मंच ‘इंडिया कानून’ की उन अपील पर दो सितंबर को सुनवाई तय की, जिनमें एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें ‘भूल जाने के अधिकार’ के आधार पर कुछ न्यायिक आदेशों को मंच से हटाने और उनके लिए ‘‘नाम आधारित खोज सुविधा’’ बंद करने का निर्देश दिया गया था।

‘भूल जाने का अधिकार’ (राइट टू बी फॉरगॉटन) लोगों को यह अनुरोध करने की अनुमति देता है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी, पुराने रिकॉर्ड या इंटरनेट पर मौजूद ऐसी डिजिटल सामग्री, जो उनके लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती हैं, उसे हटाया जाए या इंटरनेट के खोज इंजनों से छिपाया जाए।

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि जनहित ‘‘पहुंच’’ के पक्ष में है और सवाल किया कि किसी पक्षकार के नाम के आधार पर किसी को न्यायिक रिकॉर्ड तक पहुंच की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का हर्षद मेहता पर एक फैसला है। मैं हर्षद मेहता को खोज क्यों नहीं सकता?’’

एकल न्यायाधीश की पीठ ने 29 मई को किसी व्यक्ति के ‘‘भूल जाने के अधिकार’’ को मान्यता देते हुए इंडिया कानून और गूगल को नाम के आधार पर खोज की सुविधा बंद करने तथा संबंधित सामग्री को खोज परिणामों से हटाने का निर्देश दिया था।

बुधवार को ‘आईकानून सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि ‘इंडिया कानून’ ‘‘समाचार पत्र की रिपोर्ट नहीं’’ बल्कि न्यायिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने वाली कानूनी वेबसाइट है, जिसमें मौजूद रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि संबंधित रिकॉर्ड एससीसी ऑनलाइन या मनुपात्रा जैसे अन्य कानूनी मंचों पर उपलब्ध है, लेकिन एकल न्यायाधीश के आदेश के कारण इंडिया कानून पर ‘‘किसी के लिए भी प्रभावी रूप से उस तक पहुंच पाना’’ संभव नहीं है।

एक मामले में बरी किए गए पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अपील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता के दावे के विपरीत फैसला उपलब्ध है, हालांकि उसे नाम के आधार पर नहीं बल्कि मामले की संख्या जैसे अन्य विवरणों से खोजा जा सकता है।

पीठ ने कहा कि अपीलों में नोटिस जारी और स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। आदेश में कहा गया, ‘‘पक्षों के वकीलों ने कहा है कि अंतरिम पहलू पर जाने के बजाय… अपीलों पर दो सितंबर को दोपहर 2:30 बजे सुनवाई की जा सकती है।’’

भाषा शोभना संतोष

संतोष


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