रामगढ़ और गिरिडीह में दो कोयला खदानों के वैज्ञानिक पुनरूद्धार की प्रायोगिक परियोजना शुरू होगी

रामगढ़ और गिरिडीह में दो कोयला खदानों के वैज्ञानिक पुनरूद्धार की प्रायोगिक परियोजना शुरू होगी

रामगढ़ और गिरिडीह में दो कोयला खदानों के वैज्ञानिक पुनरूद्धार की प्रायोगिक परियोजना शुरू होगी
Modified Date: September 3, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: September 3, 2026 8:23 pm IST

रांची/रामगढ़, तीन सितंबर (भाषा) झारखंड सरकार ने रामगढ़ और गिरिडीह जिलों में बंद के कगार पर पहुंची दो कोयला खदानों के वैज्ञानिक पुनरूद्धार और टिकाऊ पुन: उपयोग के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करने का फ़ैसला किया है।

सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए रामगढ़ में कर्मा खुली खदान और गिरिडीह में एक और खदान को चुना है।

अधिकारी ने कहा कि राज्य जल्द ही इन दो खदानों के बारे में अपनी सिफारिशें केंद्र को भेजेगा।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘इस पहल का उद्देश्य केवल खनन गतिविधियों को सीमित करना नहीं है, बल्कि बंद खदानों को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, सामाजिक रूप से समावेशी और आर्थिक रूप से उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलना है। अंतरराष्ट्रीय अनुभव और आधुनिक तकनीकों के आधार पर तैयार यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य कोयला क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।’

बयान के मुताबिक, यह पहल कोयला मंत्रालय और जर्मनी की संस्था ‘जीआईजेड’ के सहयोग से चलाए जा रहे ‘बंद होने वाली कोयला खदानों पर तकनीकी सहयोग’ (टीसीसीएम) परियोजना के तहत लागू की जाएगी।

इस संबंध में बुधवार शाम यहां हुई बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी (राज्य के खान सचिव अरवा राजकमल समेत), जीआईजेड के प्रतिनिधि, कोयला नियंत्रक संगठन, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और सीएमपीडीआई के अधिकारी शामिल हुए।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश


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