पिंक बस टिकट अब भी महिलाओं के लिए मान्य, पिंक सहेली कार्ड बनवाने की कोई जल्दी नहीं: डीटीसी

पिंक बस टिकट अब भी महिलाओं के लिए मान्य, पिंक सहेली कार्ड बनवाने की कोई जल्दी नहीं: डीटीसी

पिंक बस टिकट अब भी महिलाओं के लिए मान्य, पिंक सहेली कार्ड बनवाने की कोई जल्दी नहीं: डीटीसी
Modified Date: March 13, 2026 / 03:38 pm IST
Published Date: March 13, 2026 3:38 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी में महिलाएं नया ‘पिंक कार्ड’ मिलने तक पिंक टिकटों का उपयोग करके डीटीसी बसों में यात्रा करना जारी रख सकती हैं।

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने एक बयान में दिल्ली की महिलाओं से ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ लेने के लिए परेशान न होने या जल्दबाजी न करने का आग्रह किया है।

बयान में कहा गया है, ‘‘यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अपने पास ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ उपलब्ध न होने के बावजूद मौजूदा प्रणाली के अनुसार ‘पिंक पेपर टिकट’ का उपयोग करके डीटीसी बसों में यात्रा करना जारी रख सकती हैं।’’

इसमें यह भी कहा गया है कि यह आकलन करने के बाद कि अधिकतर पात्र महिलाओं को ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ मिल चुके हैं, और दिल्ली सरकार धीरे-धीरे कागजी टिकट प्रणाली को समाप्त करके पूरी तरह कार्ड आधारित प्रणाली लागू करेगी।

डीटीसी ने कहा, ‘‘महिला यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे परेशान न हों या जल्दबाजी न करें, क्योंकि कार्ड वितरण समय के साथ सुचारू रूप से जारी रहेगा और सभी पात्र महिलाएं आसानी से अपना कार्ड प्राप्त कर सकेंगी।’’

दिल्ली की पात्र महिलाएं राष्ट्रीय राजधानी में डीटीसी द्वारा स्थापित 50 नामित काउंटरों से ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ नि:शुल्क प्राप्त कर सकती हैं।

दिल्ली सरकार ने दो मार्च को ‘पिंक सहेली कार्ड’ पहल शुरू की, जिसने केंद्र की ‘‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’’ पहल के तहत पहले से चली आ रही ‘पिंक पेपर प्रणाली’ को ‘पिंक एनसीएमसी कार्ड’ के माध्यम से प्रतिस्थापित कर दिया, जिससे मुफ्त यात्रा केवल दिल्ली निवासियों तक ही सीमित हो गई।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि इस कार्ड से दिल्ली-निवासी महिलाओं को डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, एक ही स्मार्ट कार्ड के माध्यम से मेट्रो, रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आरआरटीएस) और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का सुगम सशुल्क उपयोग संभव हो सकेगा।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में