‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भारत के साथ संयुक्त रक्षा उत्पादन का इच्छुक है पोलैंड

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भारत के साथ संयुक्त रक्षा उत्पादन का इच्छुक है पोलैंड

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भारत के साथ संयुक्त रक्षा उत्पादन का इच्छुक है पोलैंड
Modified Date: March 7, 2026 / 03:45 pm IST
Published Date: March 7, 2026 3:45 pm IST

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) पोलैंड भारत के साथ खासकर उन्नत ड्रोन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में रक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर उत्सुक है। पोलैंड के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह बात कही।

आर्थिक विकास एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अवर सचिव मिखाल बारानोव्स्की ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि पोलैंड के पास निगरानी और विस्फोटक भूमिका दोनों के लिए इस्तेमाल होने वाले दुनिया के कुछ बेहतरीन ड्रोन हैं।

यह पूछे जाने पर कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पोलैंड ने भारत के साथ क्या साझा किया था, इसपर बारानोव्स्की ने कहा, ‘‘ये ऐसी क्षमताएं हैं, जिन्हें हम भारत के साथ साझा कर सकते हैं और पहले भी साझा कर चुके हैं। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसका विस्तार जारी रह सकता है।’’

उन्होंने भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक साझेदार के रूप में देख रहे हैं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हम संयुक्त उद्यम के जरिए अधिक उत्पादन कर सकेंगे।’’

बारानोव्स्की ने कहा कि पोलैंड की एक प्रमुख रक्षा कंपनी की भारत में पहले से एक सहायक कंपनी है। डब्ल्यूबी समूह अपनी सहायक कंपनी डब्ल्यूबी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जरिए ड्रोन क्षेत्र में अपनी ‘मेक इन इंडिया’ मौजूदगी बढ़ा रहा है।

भारत द्वारा मई 2025 में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन के जरिए सटीक हमले किए गए थे।

पोलैंड के एक अधिकारी ने कहा कि इस अभियान के दौरान आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करने में पोलैंड के ड्रोन की भूमिका रही।

बारानोव्स्की ने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पोलैंड यात्रा के बाद संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के इस साल के अंत में भारत आने की संभावना है।

बारानोव्स्की ने कहा कि वह आर्थिक संबंधों को ‘‘अच्छे स्तर से बहुत उच्च संभावनाओं वाले स्तर’’ तक ले जाने वाले कदमों को लागू करने के लिए कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ जल्द ही भारत लौटने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने अभी यूरोपीय संघ (ईयू) और भारत के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया है। बातचीत पूरी हो चुकी है। इससे हमें कारोबारी स्तर पर और सरकार के स्तर पर संबंधों को आगे बढ़ाने का एक ढांचा मिलता है।’’

होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित करने वाले अमेरिका-ईरान संघर्ष का उल्लेख करते हुए बारानोव्स्की ने शत्रुता समाप्त करने और कूटनीति की राह पर तुरंत लौटने का आह्वान किया।

बारानोव्स्की ने कहा, ‘‘हम पहले ही ऊर्जा पर इसका असर देख रहे हैं, चाहे गैस हो या तेल। अगर यह संघर्ष जारी रहता है, तो इसका विश्व की अर्थव्यवस्था पर अभी जो असर दिख रहा है, उससे भी अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’’

भाषा सिम्मी दिलीप

दिलीप


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