प्रदर्शन की अनुमति संबंधी करणी सेना के अनुरोध पर एक सप्ताह में फैसला करे पुलिस: अदालत

Ads

प्रदर्शन की अनुमति संबंधी करणी सेना के अनुरोध पर एक सप्ताह में फैसला करे पुलिस: अदालत

  •  
  • Publish Date - September 7, 2026 / 02:55 PM IST,
    Updated On - September 7, 2026 / 02:55 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को सोमवार को निर्देश दिया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हाल में अधिसूचित समानता संबंधी नियमों के खिलाफ यहां जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाली क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत की अर्जी पर एक सप्ताह के भीतर फैसला करे।

उच्च न्यायालय को बताया गया कि प्रदर्शन पहले छह सितंबर को होना था, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर याचिकाकर्ता ने अब इसकी तारीख बदलकर 20 सितंबर कर दी है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने याचिकाकर्ता शेखावत को 20 सितंबर को पूर्वाह्न 10 बजे से शाम पांच बजे तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए दिल्ली पुलिस को नयी अर्जी देने का निर्देश दिया।

इससे पहले, याचिकाकर्ता ने छह सितंबर को प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी थी।

हालांकि, भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर पुलिस द्वारा उस दिन प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने पर अदालत ने याचिकाकर्ता को तारीख बदलने का सुझाव दिया, जिसके बाद प्रदर्शन की तारीख 20 सितंबर कर दी गई।

उच्च न्यायालय ने सोमवार को निर्देश दिया कि नयी अर्जी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखी जाए, जो 14 सितंबर तक यानी एक सप्ताह के भीतर इस पर फैसला करे।

पुलिस के वकील ने अदालत से 16 या 17 सितंबर तक का समय देने का अनुरोध किया लेकिन पीठ ने स्पष्ट किया कि अर्जी पर 14 सितंबर तक फैसला करना होगा।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ‘‘बिल्कुल नहीं। 14 सितंबर का मतलब 14 सितंबर ही है। आपको अर्जी पर 14 सितंबर तक फैसला करना होगा। आप कानून के अनुसार कोई भी उचित शर्त लगा सकते हैं या निर्देश दे सकते हैं।’’

शेखावत ने दिल्ली पुलिस के 28 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें प्रदर्शन की अनुमति संबंधी उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।

यह प्रदर्शन उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के उद्देश्य से बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को वापस लेने की मांग को लेकर किया जाना है।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा