प्रणब मुखर्जी ने जताई चिंता, कहा- बुरे दौर से गुजर रहा है देश, बढ़ गई है असहिष्णुता

प्रणब मुखर्जी ने जताई चिंता, कहा- बुरे दौर से गुजर रहा है देश, बढ़ गई है असहिष्णुता

प्रणब मुखर्जी ने जताई चिंता, कहा- बुरे दौर से गुजर रहा है देश, बढ़ गई है असहिष्णुता
Modified Date: November 29, 2022 / 08:17 pm IST
Published Date: November 24, 2018 3:31 pm IST

नई दिल्ली। एक ओर जहां राम मंदिर निर्माण को लेकर रविवार को अयोध्या में विहिप ने धर्म संसद का आयोजन किया है। वहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के हालात को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश में इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहा, जहां असहिष्णुता काफी बढ़ गई है। वे एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने कहा, ‘जिस धरती ने दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम और सहिष्णुता, स्वीकार्यता और क्षमा के सभ्यतागत मूल्यों की अवधारणा दी। वह अब बढ़ती असहिष्णुता, गुस्से का इजहार और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर खबरों में है’। उन्होंने कहा, कि शांति और सौहार्द्र तब होता है, जब कोई देश बहुलतावाद का सम्मान करता है, सहिष्णुता को अपनाता है और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना को बढ़ावा देता है।उन्होंने कहा कि संस्थानों की विश्वसनीयता बहाली के लिए सुधार संस्थानों के भीतर से होने चाहिए।

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उन्होंने कहा कि ‘हमारे संविधान ने विभिन्न संस्थानों और राज्य के बीच शक्ति का एक उचित संतुलन प्रदान किया है। यह संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 70 वर्षों में देश ने एक सफल संसदीय लोकतंत्र, एक स्वतंत्र न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, केंद्रीय सतर्कता आयोग तथा केंद्रीय सूचना आयोग जैसे मजबूत संस्थान स्थापित किए हैं, जो हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को जीवंत रखते हैं और उन्हें संबल देते हैं।


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