कोलकाता, 15 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद, दार्जिलिंग में गोरखा मुद्दे को हल करने को प्राथमिकता देगी और पूर्व के हिंसक आंदोलनों के लिए समुदाय के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी।
शाह खराब मौसम की वजह से दार्जिलिंग पहाड़ियों में स्थित लेबोंग के ऊपरी इलाकों तक नहीं पहुंच पाए और उन्होंने सभा को मालदा से एक वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया।
उन्होंने कहा, “आज आप तक नहीं पहुंच पाने का मुझे गहरा खेद है। लेकिन मैं आपसे वादा करता हूं कि 21 अप्रैल को कुर्सियोंग के सुकना में होने वाली निर्धारित जनसभा में मैं आपसे प्रत्यक्ष तौरपर मिलूंगा, जहां मैं पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करूंगा और दार्जिलिंग के लोगों के लिए हमारी कई घोषणाओं की जानकारी दूंगा।”
उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा कि बंगाल में सरकार बनने के बाद हमारी प्राथमिकता गोरखा मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान करना होगी। सत्ता में आने के बाद हम गोरखा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लंबित सभी पुलिस मामलों को वापस ले लेंगे।”
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष शाह ने कहा कि चुनाव से पहले राज्य भर में हुई उनकी सभाओं के बाद उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हरा देगी।
शाह ने कहा, “भाजपा की सरकार बनने से ना केवल बंगाल में घुसपैठ, गुंडागर्दी और ‘सिंडिकेट’ व माफिया राज खत्म होगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्र में हमारे गोरखा भाइयों के खिलाफ हजारों झूठे मामले दर्ज करके कायम किए गए पुलिस राज का भी खात्मा होगा। हम यहां गोरखा मुद्दे का स्थायी समाधान भी निश्चित रूप से निकालेंगे।”
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि गोरखा मुद्दे को सुलझाने के लिए पिछले डेढ़ साल में कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद, ममता बनर्जी और उनके प्रतिनिधियों ने दिल्ली में इस मुद्दे के समाधान के लिए आयोजित तीनों बैठकों में भाग नहीं लिया।
शाह ने कहा, ‘‘राज्य सरकार के असहयोग से निराश होकर, मैंने बंगाल से संपर्क किया और सभी संबंधित पक्षों के साथ मध्यस्थता करने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त किया। लेकिन वहां भी ममता बनर्जी ने मध्यस्थ को समय नहीं दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि वह पहाड़ियों में रहने वाले सच्चे गोरखा देशभक्तों को न्याय दिलाना या उनके अधिकारों को स्थापित करना नहीं चाहतीं।’’
उन्होंने कहा, “लेकिन आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। 5 मई को भाजपा की सरकार बनने के बाद, हम संवैधानिक दायरे में रहकर गोरखा मुद्दे का समाधान करेंगे। यह हमारी प्राथमिकता होगी।’’
शाह ने दावा किया कि वामपंथियों ने “पुलिस का इस्तेमाल करके एवं डरा-धमकाकर लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने की परंपरा” शुरू की थी, जिसे ममता बनर्जी ने जारी रखा।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा “झूठे मामलों में फंसाए गए” सभी गोरखाओं को न्याय मिलेगा और उनके खिलाफ आरोप तुरंत वापस लिए जाएंगे।
दार्जिलिंग पहाड़ियों में रहने वाले नेपाली भाषी भारतीयों की दशकों पुरानी गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर अतीत में कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं।
वर्ष 2011 में दार्जिलिंग के ऊपरी इलाकों और तलहटी के कुछ हिस्सों के प्रशासन के लिए अर्ध-स्वायत्त गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के गठन के बावजूद, 2017 तक हिंसक आंदोलन होते रहे।
इस क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) जैसी स्थानीय गोरखा पार्टियों तथा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जहां अलग गोरखालैंड की मांग हमेशा से राजनीतिक केंद्र में रही है।
आगामी चुनाव में, तृणमूल कांग्रेस ने बिमल गुरुंग की जीजेएम से अलग हुए गुट, अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजेपीएम) के साथ रणनीतिक सीट-साझाकरण गठबंधन किया है। तृणमूल कांग्रेस ने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियोंग की सीट अपने सहयोगी दल के लिए छोड़ दी हैं।
दूसरी ओर, भाजपा ने एक बार फिर गुरुंग का समर्थन हासिल किया है, हालांकि इस बार भाजपा इस क्षेत्र से सीधे चुनाव लड़ रही है।
दार्जिलिंग में मतदान 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के पहले चरण में होगा। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जिसके बाद 4 मई को मतगणना होगी।
भाषा अमित माधव
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