प्रियांक ने एआईसीसी प्रमुख की ‘सांप’ वाली टिप्पणी का समर्थन किया, असम के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा

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प्रियांक ने एआईसीसी प्रमुख की 'सांप' वाली टिप्पणी का समर्थन किया, असम के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 06:24 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 06:24 PM IST

बेंगलुरु, आठ अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ अपने पिता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ‘जहरीले सांप’ वाली टिप्पणी का बचाव किया।

उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर भी निशाना साधते हुए उन्हें ‘हताश’ बताया और मल्लिकार्जुन खरगे पर उनकी टिप्पणियों को लेकर उन पर ‘जातिगत विशेषाधिकार’ का भाव रखने का आरोप लगाया।

प्रियांक खरगे ने एक प्रश्न के उत्तर में पूछा, ‘उन्होंने (मल्लिकार्जुन खरगे ने) क्या कहा है? उन्होंने कहा कि अगर किसी को विषैला सांप दिखे तो तुरंत हरकत में आना चाहिए। अगर आपको कोई विषैला सांप दिखे तो क्या आप उसे दूध पिलाकर उसकी देखभाल करेंगे या उसे भगा देंगे?’

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारे समाज में सांप्रदायिक जहर के बीज कौन बो रहा है? क्यों? क्या हमें ऐसी विचारधाराओं और सिद्धांतों को बचाना और बढ़ावा देना चाहिए? नहीं। यही बात उन्होंने (मल्लिकार्जुन खरगे) कही है। हम यह बात लंबे समय से कहते आ रहे हैं, सिर्फ अभी नहीं।’

मंत्री ने आरएसएस की विचारधारा और सिद्धांतों को देश और समाज की प्रगति के लिए हानिकारक बताते हुए कहा कि उनका दृष्टिकोण संविधान, अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों, दलितों या यहां तक ​​कि महिलाओं के लिए भी उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा, ‘वे मनुस्मृति में विश्वास करते हैं; हम संविधान का पालन करते हैं।’

यह सवाल उठाते हुए कि किसी विषैले सांप का सामना होने पर क्या किया जाए खरगे ने कहा, ‘क्या आप किसी वन कर्मी को बुलाएंगे? वे उसे पकड़कर जंगल में छोड़ देंगे। अगर आपको कोई ऐसा नहीं मिले तो आप क्या करेंगे? गांवों में लोग क्या करते हैं? यदि कोई विचारधारा देश की प्रगति के लिए अच्छी नहीं है, तो उसे नहीं अपनाना चाहिए।’

सोमवार को असम के श्रीभूमि जिले में एक चुनावी रैली में मल्लिकार्जुन खरगे ने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि अगर नमाज अदा कर रहे किसी व्यक्ति के सामने से कोई जहरीला सांप गुजर जाए तो उस व्यक्ति को नमाज रोककर सांप को मार देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘मैं कहूंगा कि नमाज तोड़ना कोई मायने नहीं रखता। आरएसएस और भाजपा उस विषैले सांप की तरह हैं। अगर आप इस सांप को नहीं मारेंगे तो आप जीवित नहीं रह पाएंगे।’

एआईसीसी प्रमुख के खिलाफ शर्मा की टिप्पणियों को लेकर उन्हें ‘हताश’ बताते हुए प्रियांक ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे लगभग 50 वर्षों से राजनीति में हैं और न तो भाजपा और न ही प्रधानमंत्री के पास उन सवालों के जवाब हैं जो वह संसद में और बाहर उठाते हैं।

उन्होंने दावा किया, ‘आरएसएस प्रशिक्षण के बाद शर्मा में जातिगत विशेषाधिकार की जो भावना पैदा हुई, वह कांग्रेस में रहते हुए उनमें नहीं थी। शर्मा ब्राह्मण समुदाय से हैं। उन्हें यह विशेषाधिकार प्राप्त है और वे मानते हैं कि वे जो कुछ भी कहते हैं, चाहे वह दलितों या दलित नेताओं के खिलाफ हो, वह स्वीकार्य है।’ उन्होंने कहा कि यह आरएसएस की विचारधारा और ‘चतुर्वर्ण’ (चार वर्ण की व्यवस्था) के प्रति उसके पालन को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि शर्मा एक ‘प्रबुद्ध और जागरुक समुदाय’ से आते हैं और उनका मानना ​​है कि वे अन्य समुदायों के लोगों के खिलाफ बोल सकते हैं।

उन्होंने पूछा, ‘इस बारे में प्रधानमंत्री मोदी का क्या कहना है? क्या वह इसका बचाव करेंगे? क्या वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता के खिलाफ अपने मुख्यमंत्री द्वारा की गई टिप्पणियों को स्वीकार करेंगे?’

मंगलवार को शर्मा के उस बयान से विवाद शुरु हो गया जिसमें उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बुढ़ापे के कारण ‘पागल की तरह बोल रहे हैं।’ मल्लिकार्जुन खरगे ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ लगे आरोपों की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की थी।

भाषा शुभम वैभव

वैभव