प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के ऋण माफ करने का अनुरोध किया

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प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री से वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के ऋण माफ करने का अनुरोध किया

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  • Publish Date - January 24, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - January 24, 2026 / 06:29 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

वायनाड (केरल), 24 जनवरी (भाषा) कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फिर से पत्र लिखकर वायनाड में मुंडक्कई-चूरलमाला आपदा के पीड़ितों द्वारा लिए गए ऋणों को माफ करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। पार्टी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

एक बयान में कहा गया है कि कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री से आपदा राहत कार्यों के लिए राज्य को दिए गए ऋणों को अनुदान में परिवर्तित करने का भी आग्रह किया है।

पार्टी ने कहा है कि मुंडक्कई-चूरलमाला भूस्खलन के संबंध में वायनाड को कोई केंद्रीय सहायता नहीं मिलने के बाद, केरल के सभी सांसदों ने दिसंबर 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी।

इसके बाद फरवरी 2025 में प्रियंका ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह बताया था कि भूस्खलन के छह महीने बाद पुनर्वास के लिए ऋण के रूप में धन उपलब्ध कराना ‘अन्यायपूर्ण और अमानवीय’ था।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आपदा में अपनी आजीविका खो चुके जीप और ऑटो रिक्शा चालकों, छोटे व्यापारियों और होमस्टे संचालकों के ऋण माफ करने का भी अनुरोध किया था।

वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पिछले साल अक्टूबर में एक अन्य पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से दोबारा यह अनुरोध किया था।

उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से बैंकों को निर्देश देने का भी अनुरोध किया था कि वह अपनी वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आपदा पीड़ितों को दिए गए ऋण माफ कर दें।

बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने अदालत में यह रुख अपनाया था कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन के बाद ऋण माफ नहीं किए जा सकते।

हालांकि, केरल उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की थी कि संविधान के अनुच्छेद 73 के तहत केंद्र सरकार द्वारा ऋण माफी के संबंध में कोई बाधा नहीं है।

संविधान का अनुच्छेद 73 केंद्र सरकार की कार्यकारी शक्तियों की सीमा निर्धारित करता है।

जुलाई 2024 में वायनाड के मुंडक्कई-चूरलमाला क्षेत्र में हुए भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों घर नष्ट हो गए थे।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप