प्रक्रियात्मक खामियां, कोई राय नहीं दी गई: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ मामलों पर यूपीएससी का बयान

प्रक्रियात्मक खामियां, कोई राय नहीं दी गई: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ मामलों पर यूपीएससी का बयान

प्रक्रियात्मक खामियां, कोई राय नहीं दी गई: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ मामलों पर यूपीएससी का बयान
Modified Date: February 26, 2026 / 08:16 pm IST
Published Date: February 26, 2026 8:16 pm IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने केंद्रीय सूचना आयोग को सूचित किया है कि उसे पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर से संबंधित मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार और गृह मंत्रालय से अनुशासन संबंधी संदर्भ प्राप्त हुए थे, लेकिन प्रक्रियात्मक और दस्तावेजी खामियों के कारण उन पर कोई राय दिए बिना उन्हें वापस कर दिया गया।

ठाकुर द्वारा दायर किए गए आरटीआई आवेदनों की सुनवाई करते हुए, सीआईसी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी की उन अपीलों को खारिज करते हुए यूपीएससी के रुख को दर्ज किया, जिनमें अनुशासनात्मक मामलों से संबंधित संदर्भों, राय, नोट-शीट और पत्राचार की प्रतियां मांगी गई थीं।

ठाकुर को 23 मार्च, 2021 को ‘‘जनहित’’ का हवाला देते हुए समयपूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया था, क्योंकि अधिकारियों ने उन्हें अपनी सेवा के शेष कार्यकाल के लिए ‘‘अयोग्य’’ पाया था।

ठाकुर को 10 दिसंबर, 2025 को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि उन्होंने 1999 में देवरिया के पुलिस अधीक्षक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अपनी पत्नी के नाम पर एक औद्योगिक भूखंड हासिल किया था। भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी को इस महीने की शुरुआत में जमानत मिल गई थी।

हालांकि, ठाकुर ने दावा किया है कि उनकी गिरफ्तारी कफ सिरप के मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना से जुड़ी है।

संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों में यूपीएससी की एक अनिवार्य सलाहकार भूमिका होती है, जिसके अनुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के बाद राष्ट्रपति द्वारा किसी भी बर्खास्तगी या निष्कासन आदेश पारित करने से पहले परामर्श करना आवश्यक होता है।

यूपीएससी के जवाबों का हवाला देते हुए, सीआईसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 सितंबर, 2020 के एक पत्र के माध्यम से सलाह मांगी थी, जिसे उसी वर्ष 29 अक्टूबर को ‘‘अनुशासनात्मक कार्यवाही के मामले के रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण’’ वापस कर दिया गया था।

उसने कहा कि 21 जनवरी, 2021 को भेजे गए एक अन्य संदर्भ को 23 जून, 2021 को ‘‘कुछ प्रक्रियात्मक/दस्तावेजी कमी’’ के कारण फिर से लौटा दिया गया, जिसमें यूपीएससी ने कहा कि ‘‘इन मामलों में कोई राय नहीं दी गई है।’’

भाषा शफीक रंजन

रंजन


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